Tuesday, 2 October 2012

रीतु दीदी - Ritu Didi

येह घतना कैए साल पहले कि है जब मेरि उमर 19-20 साल कि थि और मैन BA मेन पधता था। मैन देखने मेन गोरा चित्ता खूबसूरत इनसान था। मेरि लमबै 5 फ़ीत 11 इनच थि और मेरा शरीर हत्ता कत्ता था। मैन होसकेय तेअम का सपतैन था और रोज़ सविम्मिनग भि करता था। मेरा बदन अथलेते के बदन जैसा था।

मेरे पदोस मेन एक सोलोनेल सहब अपने परिवार के साथ रहते थे। परिवार मेन वोह सवयम, उनकि पतनि और एक बेति थि। सोलोनेल सहब का नाम सोल।बलविनदेर सिनघ था उनकि उमर लगभग 54 साल कि होगि। उनकि पतनि का नाम नीतु था और वोह एक खूबसूरसत महिला थीन उमर लगभग 52 साल होगि पर देखने मेन 45-46 साल कि हि लगति थिन। उनकि जवन बेति का नाम रितु था और उमर करीब 27 साल कि थि। देखने मेन बहुत सुनदर। बदन एक दम धला हुआ । बदे बदे उभरे हुए मम्मे पतलि कमर और भरे हुए कुलहे। हर दरेस्स मेन बहुत जमति थीन। 27 साल कि हो जाने पर भि उनहोन ने शादि नहिन कि थि कयोन कि उनहोन्ने गरमेनतस बनाने का काम शुरू किया था और उनका बुसिनेस्स अच्चहा चल निकला था। कहते हैन कि विदेश मेन भि उनके गरमेनतस एक्सपोरत होते थे जिस्से उनकि अच्चहि इनसोमे हो रहि थि। उनके माता पिता भि उनके वयोपार मेन उनकि सहायता करते थे।

सुना था कि सोलोनेल सहब का परिवर बहुत हि बरोअद मिनेद था। किसि चीज़ से परहेज़ नहिन था। शराब उनके घर मेन सुना था कि सभि पीते हैन। सेक्स मेन भि लिबेरल थे। आए दिन उनके यहान परती होति थीन। या वोह लोग कहिन परती मेन जाते थे। सेक्स परतनेरस मेन भि अदला बदली होति थी जैसा कि लोगोन के मुनह से मैने सुना था।

हुम लोगोन का उनके यहन आना जाना कम हि था। तीज तयोहारोन मेन हुम लोग उनके यहान जाते थे या वोह आते थे।

उन दिनोन दशेहरा कि छुतियान थीन।मेरे पास कोइ काम धाम तो था नहिन कभि किसि दोसत के यहन कभि किसि और दोसत के यहन चला यहान चला जाया करता था।

उस दिन असमनजस मेन था कि किस के यहान जाउन। तभि मेरे कान मेन रितु दिदि कि आवाज़ सुनाई दि: विजय।

मैन उनके पास गया उनसे पूनछा कया आप ने बुलाया है। वोह बोलीन कि कया तुम इस समय खालि हो। अगर खालि हो तो मेरा एक काम कर दो।

मैन ने कहा मैन आज कल बिलकुल खालि हुन। काम बताइये।

वोह बोलीन लतेसत विदेओ सतोरेस को जानते हो? मैन ने कहा हान जानता हुन

वोह बोलीन। अभि उसका फोने आया था कि एक नया सद आया है उसे मनगवा लीजिये। मेरे यहान आज कोइ नहिन है अगर तुम ला सको तो ला दो।

मैन ने कहा येह कौनसि बदि बात है अभि ला देता हुन

रितु दिदि बोलीन उस्से बता देना कि मैन ने भेजा है वोह दे दे गा

मैन लतेसत विदेओ सतोरेस चला गया और उस्से बोला कि रिता जि ने भेजा है आपने अभि उनहेन फोने किया था।

उस ने कहा अभि देता हुन और अनदर जा कर एक सद लाकर मुझे दे दि। मैन सद ले कर रितु दिदि के पास गया और उनहेन वोह सद दे दि।

रितु दिदि बोलीन अगर तुम खालि हो तो आओ मोविए साथ बैथ कर देखेन

मैन ने कहा मैन तो बिलकुलहि खालि हुन चलिये आप के साअथ मोविए हि देख लून।

तव के सामने सोफ़ा पर हुम दोनोन बैथ गये। रितु दिदि ने सद लगा दि मोविए शुरू हो गैए।

मोविए कि शुरूआत ऐसी थि कि एक लदकि किसि लदके को फोने कर के बुलाति है । लदका लदकि के घर आता है। आ कर सल्ल बेल्ल बजाता है। लदकि दरवाज़ा खोलति है और दोनोन एक दूसरे को बाहोन मेन ले कर एक दूसरे का चुम्मा लेने लगते हैन। फिर लदकि लदके कि कमीज़ उतारती है और लदका लदकि का बलौसे।फिर धीरे धीरे दोनोन एक दूसरे के कपदे उतार के बिलकुल ननगे हो जाजे हैन।

फिर लदका लदकि को पीथ के बल लिताल कर उसकि चूचियोन के निप्पलेस एक एक कर के चूसता है लदकि मुनह से आअह आआह आह आह करने लगति है फिर लदकि लदके से चोदने को कहति है लदका अपना खदा लुनद उसकि बुर मेन धीरे धीरे दालता है और फिर चुदै करने लगता है।

रितु दिदि ने मुझ से पूनछा बताओ येह दोनोन लदके लदकि कया कर रहे हैन?

मैन चुप रहा रितु दिदि मुझ से उमर मेन काफ़ि बदि थीन।

वोह बोली बताओ ना। मैन्ने कहा दोनोन चुदै कर रहे हैन।

रितु दिदि ने मुझ से पूनछा कया तुम भि चुदै कर चुके हो?

मैन ने कहा मेरि कोइ लदकि दोसत हि नहिन है फिर किसके साथ चुदाई करता?

रितु दिदि ने पूनछा फिर तुमहेन येह सब कैसे मालूम हुअ?

मैन ने बताया कि मेरा एक दोसत रमु है वोहि हिनदि कि गनदि गनदि किताबेन ला कर देता है। उसि मेन येह सब लिखा होता है।

वोह किताबेन पधने मेन बदा मज़ा आता है। पधते पधते लुनद खदा हो जाता है फिर अपना लुनद निकाल लेता हुन ।किताब फधता जाता हुन और लुनद को एक हाथ से पकद कर मुत्तहि मारता जाता हुन। थोदि देर मेन झद जाता हुन। रितु दिदि सचमुच बहुत मज़ा आता है।

रमु क्सक्सक्स विदेओ भि लाता है जब उसका घर खालि होता है तब हुम दोनोन वहिन बैथ कर क्सक्सक्स मोविएस भि देखते हैन।

रितु दिदि ने पूनछा कि बिना लदकि के तुम लोगोन को कया मज़ा आता होगा ?

मैन ने कहा कि हुम लोग बिना लदकि के भि खूब मज़ा लेते है।

रितु दिदि ने पूनछा कैसे?

मैने उनहेन बतया कि हुन दोनोन ननगे हो कर एक दूसरे कि गानद मारते हैन।

रितु दिदि ने पूनछा गानद कैसे मारते हो?

मैने बतया कि जैसे लदका लदकि कि बुर मेन अपना लुनद दाल कर अनदर बाहर करता है वैसे हि हुम लदके गानद मेन लुनद घुसेद कर अनदर बाहर करते हैन और गानद मेन हि झद जाते हैन।

रितु दिदि बोलीन अच्चहा कया इस मेन मज़ा आता है?

मैन ने बतया कि बहुत मज़ा आता है।

रितु दिदि ने पूनछा कि गानद मारने मेन ज़यदा मज़ा आता है कि गानद मराने मेन?

मैने कहा कि दोनोन मेन। शुरू शुरू मेन गानद मराने मेन दरद होता है पर कुछ बार गानद मराने के बाद गानद खुल जाति है तो फिर गानद मराने मेन भि उतना हि मज़ा आने लगता है जितना कि गानद मारने मेन। कुछ लोगोन को तो इनतना मज़ा आने लगता है कि वोह तो गानदू हो जाते हैन और गानद मारने कि जगह गानद मराना हि पसनद करने लगते हैन।

मैन ने उनहेन बताया कि गानद मारने मराने के अलावा हुम लोग कभि कभि 69 कि सथिति मेन लेत कर एक दूसरे का लुनद भि चूसते हैन या एक दूसरे का लुनद पकद कर सदका मारते हैन।

मैन ने रितु दिदि से पूनछा “ आप ने कभि अपनि गानद नहिन मरवाई”/

वोह हनसने लगीन। बोलीन कि दो एक बार मरवाई थि पर दरद बहुत हुआ मज़ा कोइ खास नहिन आया।

रितु दिदि ने फिर पूनछा कि कया तुमने किसि लदकि या औरत को ननगा देखा है? जैसे अपनि मा, बहेन, भभि, मौसि , नौकरनि को नहाते या कपदे बदलते?

मैने कहा कि नहिन तो वोह बोलीन मुझे ननगा देखो गे?

मैन ने कहा अगर आप दिखाएनगि तो ज़रूर देखूनगा।

वोह बोलीन कि एक शरत पर

मैन ने पूनछा वोह कया?

वोह बोलीन पहले तुमहेन ननगा होना पदेगा।

येह सुनकर मैन चुप चाप खदा रहा।

रितु दिदि बोलीन उतारो अपने सब कपदे।

मैन ने कहा कि मुझे शरम लग रही है। आज तक मैन किसि लदकि या औरत के सामने ननगा नहिन हुआ हुन।

वोह बोली मैन लदकि हो कर तुमहारे सामने ननगि होने को तैययर हुन और तुम लदके हो कर शरमा रहे हो?

रितु दिदि ने जब फिर कहा कपदे उतारने को तब मैन ने एक एक कर कपदे उतारने शुरू किये। पहले कमीज़ फिर पनत फिर बनियन उसके बाद मैन रुक गया। रितु दिदि बोली उतारो ना अपना उनदेरवेअर। फिर मैन ने आनखेन बनद करके उनदेरवेअर उतार हि दिया। मेरा लुनद बिलकुल तना हुआ खदा था।

रितु दिदि आगे बधिन और उनहोन ने मेरा लुनद हाथ मेन लेकर कहा कि तुमहारा लुनद तो अच्चहा खासा लमबा और मोता है। रितु दिदि ने पूनछा “मुझे चोदो गे?”

मैन ने कहा अगर आप चुदवाएनगी तो कयोन नहिन चोदूनगा। मगर पहले आप ननगि तो होइये।

वोह बोली चलो मेरे बेदरूम मेन। वोह आगे आगे चलीन मैन उनके पीछे पीछे।

बेदरूम पहुनच के वोह बोली अब मैन भि ननगि हो जाति हुन। फिर उनहोन ने एक एक कर अपने सब कपदे उतार दिये। पहले बलौसे फिर सलसकस फिर बरस्सिएरे और उसके बाद अपनि पनती। उनकि झानतेन कालि कालि और खूब बदि बदि थीन।

मैन अब तक काफ़ि खुल गया था रितु दिदि से। मैन ने उनसे पूनछा “आप अपनि झानतेन साफ़ नहिन करति हैन?”

वोह बोलीन कभि कभि करति हुन पर इधर समया हि नहिन मिल पाया। किसि दिन साफ़ कर लून गि।

मैन्ने कहा आज मैन पहलि बार किसि लदकि को ननगा देख रहा हुन और आप कि झानतेन आप पर बहुत हि अच्चहि लग रहिन हैन। इस्से आप कि खूबसूरति और भि बध गैए।

रितु दिदि कि चूचियन भि बदि बदि थीन और कसि हुई और गुलाबि निप्पलेस भि उनकि शोभा बधा रहे थे।

रितु दिदि ने पूनछा मैन ननगि कैसी लगि?

मैन ने कहा जैसा मैन समझता था उस्से खैन ज़यादा खूबसूरत।

रितु दिदि मुसकुराईन और बोलीन आओ अब चोदो मुझे।

उनहोन ने कहा कि चोदने से पहले मेरा चुम्मा लो फिर मेरि चूचियान एक एक कर चूसो फिर मेरि चूत चातो और जीभ से मेरि सलित सहलाओ उसके बाद चूत मेन लुनद दाल के चोदो।

वोह बोली “तुमने किसि लदकि कि चूत तो देखि नहिन होगि आओ पहले तुमहेन अपनि चूत और सलित दिखा देन।

फिर रितु दिदि ने अपनि तानगेन फैला कर अपने भगोशथ फैलाये और बतने लगेन कि येह बुर है येह सलित है।

फिर वोह लेत गैएन और मैन ने उनहेन चिपका कर उनके गालोन का चुम्मा लिया फिर उनकि चूनचियोन के निप्पलेस चूसने लगा। वोह सिसकारियान ले रहिन थीन फिर उनहोन ने मेरा लुनद पकद लिया और सहलाने लगीन। मेरा लुनद पहलि बार ज़िनदगि मेन किसि लदकि ने पकदा था और उनके सहलाने से मैन झदने कि हालत मेन आ गया। उनसे कहा तो बोलीन कि बगल मेन बथरूम है वहिन अपना निकाल आओ। मैन सोम्मोदे मेन अपना वीरया गिरा कर और लुनद धो कर आ गया। मुझे बहुत हि शरम लगी पर रितु दिदि ने मेरा धानधस बनधाते हुए कहा घबरओ मत पहलि बार कैए लोग ऐसे हि बिना चोदे झद जाते हैन।फिर रितु दिदि ने मेरा लुनद अपनि मुत्तहि मेन लेकर आगे पीछे करने लगिन। मेरा लुनद फिर खदा हो गया अब रितु दिदि बोलीन कि आओ अब इसे मेरि बुर मेन दाल दो और मुझे चोदो।

वोह लेत गैएन और मैने अपना लुनद उनकि बुर मेन दाल दिया धीरे धीरे फिर मैन उनहेन चोदने लगा वोह भि मेरे धक्के के साथ धक्के लगा रहीन थीन और अपनि सलित भि मेरे बदन से रगद रहीन थे थोदि देर मेन वोह सिसकारियान लेने लगीन और वोह झद गैएन फिर मैने भि ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाये और थोदि हि देर मेन मैन भि झदने के निकत पहुनच गया। मैने रितु दिदि से पूनछा कि अनदर झदून कि बाहर। वोह बोली अनदर हि झद जाओ। फिर मैन उनकि बुर के अनदर हि झद गया और थोदि देर बुर मेन लुनद दाले लेता रहा। उसके बाद मैन ने लुनद निकाल लिया।

रितु दिदि ने पूनछा लदकि को चोदने मेन ज़यदा मज़ा आया कि लदके कि गानद मारने मेन?

मैन ने कहा कि आप को चोदने मेन।

रितु दिदि ने मेरा चुम्मा लिया और बोलीन तुमसे चुदवाना बदा अच्चहा लगा।

इसके बाद रितु दिदि ने कहा “एक काम करोगे?”

मैन ने कहा ज़रूर करूनगा।

वोह बोलीन; “मैन ने आज तक ना वसतव मेन ना मोविए मेन एक लदके को दूसरे लदके कि गानद मारते नहिन देखा है। कया तुम मुझे येह दिखा सकते हो?”

मैन ने कहा कि ऐसी मोविए तो मैन्ने भि नहिन देखि।

वोह बोली” कया तुम अपने दोसत रमु कि गानद मेरे सामने मार सकते हो? और अपनि गानद मेरे सामने रमु से मरवा सकते हो?”

मैन्ने कहा कि मुझे तो कोइ एत्राज़ नहिन है आप के सामने गानद मारने मेन या मरवाने मेन पर रमु से पूनछना पदेगा कि वोह इसके लिये तैययर होगा कि नहिन।

वोह बोलीन रमु से पूनछ के बताना। मगर कल हि येह सब करना है।

मैन ने पूनछा कि कल हि कयोन तो वोह बोलीन कि कल रात या परसोन सुबह तक उनके माता पिता लौत आयेनगे फिर येह सब नहिन हो पाएगा।

मैन ने कहा कि मान लीजिये रमु इस शरत पर तैययर हो जाये कि वोह भि आप को चोदेगा तब?

वोह बोलीन कि थीक है उस्से भि चुदवा लूनगि पर मैन तुम दोनोन को गानद मारते हुए देखना ज़रूर चाहूनगि।

मैन्ने पूनछा रितु दिदि येह बतैये कया आप ने किसि लदके को लदकि को चोदते या लदकि को चुदते हुए देखा है?

रितु दिदि बोलीन हान कैए बार। मेरि एक सहेलि है उसका बोय फ़रिएनद मेरा भि दोसत है। वोह अकसर जब मेरा घर या उसका घर खालि होता है तो मेरे सामने हि मेरि सहेलि को चोदता है और मुझे भि मेरि सहेलि के सामने हि चोदता है बरि बारि से।

रितु दिदि ने पूनछा कि तुमहरे रमु का लुनद कैसा है तुमहारे जैसा हि या उस्से बदा?

मैन ने बतया कि उसका लुनद तो मेरे लुनद से छोता है 5 इनच का होगा और पतला भि है।

रितु दिदि बोली अच्चहा उस्से पूनछ कर बताना।

मैन ने कहा शाम तक बता दूनगा। फिर मैन घर लौता आया।

शाम को रमु को सब कुछ जो रितु दिदि के साथ हुआ था उसे बताया।

वोह बोला यार मुझ से भि उसे चुदवा दो। मेरि जाने कब से उसे चोदने कि इच्चहा है पर कोइ तरकीब समझ मेन नहिन आई।

मैन ने बतया कि एक हि शरत पर वोह तुमसे चुदवाने को तैययर हो सकति हैन।

रमु ने पूनछा वोह कया?

शरत येह है कि रितु दिदि के सामने तुम मुझ से अपनि गानद मरवाओ और रितु दिदि के सामने हि मेरि गानद मारो।

रमु बोला येह तो मैन नहिन करूनगा।

मैन ने उसे बताया कि मैन तो रितु दिदि से सब बता चुका हुन कि हुम तुम दोनोन एक दूसरे कि गानद मारते हैन लुनद भि चूसते हैन और सदका भि मारते हैन।

रमु बोला जब उनहेन सब मालूम हि हो गया है तो थीक है। मैन भि उनके सामने तुम से अपनि गानद मरवा लूनगा और तुमहारी गानद भि मार दूनगा पर वोह मुझे चोदने को तो मिलजाएनगि।

मैन ने कहा कि उनहोन ने वादा किया है कि वोह तुम से भि चुदवा लेनगि।

रमु ने कहा कि जा कर हान कह दो कल कब उनके यहान चलना है?

मैन्ने कहा कि मैन उनसे पूनछ कर तुमहेन बता दूनगा।

शाम के सात बजे मैन रितु दिदि के यहान गया और उनहेन बता दिया कि रमु उसि शरत पर तैययर है कि आप को उस्से चुदवाना पदेगा।

रितु दिदि बोलीन थीक है।

मैन ने पूनछा रमु को कब बुलाउन। वोह बोलीन कि कल दिन मेन तीन बजे बुलओ। मगर तुम पहले आ जाना।

मैन ने कहा कि कल सुबह उसे बता दूनगा और मैन चलने लगा।

वोह बोलेन कि कया जलदि मेन हो। मैन ने कहा कि मुझे आज कल कोइ काम हि नहिन है।

रितु दिदि बोली कि तब तो थोदि देर और बैथो मैन भि खालि हि हुन और अकेलि बोरे हो रहि हुन।उनहोन ने पूछा कि तुम बीर पीते हो?

मैन ने कहा कभि कभि जब कोइ पिला देता है वैसे मेरे पास इतने पैसे कहान हैन कि बीर पी सकून।

उनहोन ने अनदर बुला कर बैथाया और बोलीन कि मैन बीर ले कर आति हुन।

फिर वोह अनदर गैएन और कुछ नमकीन रख गैएन और फिर अनदर जा कर बीर कि चिल्लेद बोतल और दो गिलास ले आईन।

फिर उनहोने बोतल खोलि और गिलासोन मेन दालि। और चीरस के बाद हुम दोनोन बीर धीरे धीरे पीने लगे

वोह बहुत सि बातेन करति रहिन और मुझ से पूनछति रहिन।

उनहोन ने येह भि पूनछा कि कल रमु तो मुझे चोदे गा और तुम कया करोगे?

मैन ने कहा कि क्सक्सक्स मोविएस मेन मैन 3-सोमे के बहुत से ससेनेस देखे हैन आप ने भि देखे होनगे।

उनहोन ने कहा कि देखे तो हैन पर कभि किया नहिन।

मैन ने कहा कि अगर आप राज़ि होनोन तो हुम लोग थरी-सोमे भि कर के देखेन। मैन आप कि बुर चोदून और रमु आप कि गानद मरे साथ हि साथ। बीर का तो कुछ नशा था हि वोह बोलीन थीक है मैन भि इसे त्री करून गि। रितु दिदि ने मुझे अपने पास खीनच कर मेरा चुम्मा दो तीन बार लिया और एक हाथ से मेरा लुनद दबाया। मैन ने भि एक बार चुम्मा लिया और एक हाथ से उनकि एक चूचि दबा दि।वोह हनसने लगीन और बोली कि तुम दो बजे तक ज़रूर आ जाना।

फिर मैन वहान से चला आया। लौत- ते समय मैन रमु के घर गया और उसे बता दिया कि रितु दिदि के घर 3 बजे ज़रूर पहुनच जाए। उस ने पूनछा कि तुम साथ नहिन चलोगे? मैन्ने कहा कि मैन अलग से पहुनच जाउनगा और मैन रितु दिदि के घर पर हि मिलूनगा।

जब चोदा मौसी को - Jab Choda Mausi Ko.

आपके मैलस मुझे काफ़ि तदात मे मिले और जान कर खुसि हुइ कि मेरि 3नो कहानि जिसका तितले एक अज़ीब दासतान था आप सबको बहुत पसनद आयि अब मैन अपना एक और सहकार पेस कर रहा हून और उम्मीद है कि ये भि पसनद आयेगा तो दोसतोन आज कि कहानि मे मैन अपनि मौसि और उसकि 14 साल कि लदकि को कैसे चोदता हून ये बताता हून आपको मैन अपनि मौसि के यहान जबल पुर गया था और वो मुझे देख कर बहुत खुस हुइ थि कयोनकि मैन बहुत दिन बाद गया था मेरि मौसि कि एक लदकि भि थि जिसकि अगे अभि सिरफ़ 14 साल थि पर मेरि मौसि कि अगे 38 साल थि और वो थोदि सि मोति थि उनकि चूचियान भि बहुत बदि।।।बदि थि एक दिन जब पिनकी सचूल गयि हुइ थि और मैन चत पर था तब मौसि आनगन मे नहा रहि थि जादे के दिन थे वो नहाते हुए धूप का अननद लेना साहति थि सायद इसि वझा से खुल्ले मे नहा रहि थि और मैन चत पे था तब हि मैने देखा कि नीचे मौसि नहा रहि है उनके बदन पर सिरफ़ वहिते सोलौर का पेतिसोत था जिसे वो अपनि चूचियोन तक चदाय हुए थि और झरा।।।

झरा पानि से नहा रहि थि तब वो साबुन उथा कर रगदने लगि और अपने पैर फ़ैला कर पेतिसोत को जानघोन से उपर उथा कर साबुन मलने लगि पानि मे भीग जाने से पेतिसोत उनके जिसम से चिपक गया था और मुहजे उनका बदन और उनकि चूचि साफ़ साफ़ नज़र आ रहि थि अब वो अपनि चूचयोन पे भि साबुन लगाने लगि इतनि देर मे मेरा लनद भि खदा हो चुका था मैन अपना लनद पेनत मे से बहर निकाल कर हाथ से रगदने लगा और धोदि देर बाद मौसि नहा कर अनदर चलि गयि और मैने भि अपना पानि हाथ मार कर झाद लिया अब मुझमे मौसि को चोदने कि बात घर कर गयि पर रिसता ऐसा था कि कुच कर नहि सकता था मौसा जि भि बहुत सखत किसम के आदमि थे उनसे मैन दरता भि बहुत था वो तो सुकर था कि वो देलहि गये हुए थे मैन मौसि को चोदने कि पलनिनग करने लगा और बहुत सोचने के बाद आखिर मुझे एक पलान आ हि गया जब रात को मौसि अपने रूम मे लेति थि और मैन भि लुनगि पहनकर सोने जा रहा था तब हि मैने कस के अवाज़ मारि बचाओ बचाओ तभि मौसि जलदि से मेरे रूम मे आ गयि और घबरा कर बोलि कया हुअ बेता? मैन मौसि को देखता हि रह गया उनका गौन बहुत हि सेक्सि था जिसके आगेय के बतन उनहोने खोल रखे थे और घबराहत मे बुत्तन बनद करना वो भूल हि गयि थि जिस्से कि उनकि रेद बरेस्सरि नज़र आ रहि थि मैने दरते हुए कहा कि मौसि मुझे बहुत बुरा सपना आया था और खते हुए झत से उनसे चिपक गया वो फले तो झिझक गयि फ़िर दोनो हाथ बदा कर मुझको अपने बदन से चिपका लिया चूनकि मैन बेद पे था और वो ज़मीन पे तो उनकि चूचि मेरे मुह के पास थि मैन उनकि चूचि को जोर से अपने मुह से दबाते हुए बोला कि मौसि मुझे बहुत दर लग रहा है पलज़ आप आज मेरे साथ सो जाइये तब मौसि ने कहा धत्त तुम तो बस्सहोन कि तरह दर रहे हो 22 साल के हत्ते।।।

कत्ते मरद होकर भि दरते हो और फ़िर वहिन बैथ गयि बोलि अछा तु सोजा मैन अभि यहिन बैथि हून जब तु सो जायेगा तब मैन चलि जाउनगि और मैन सोने का नातक करने लगा मौसि ने अभि भि बुत्तुन नहि बनद किये थे और मैन धीरे ।।।धीरे अपनि लुनगि सरकाने लगा मैने नीचे जान।।।बूझ कर आज कुच भि नहि फना था मैने अपनि लुनगि पैरोन के दोनो तरफ़ सरका दि और मेरा लनद बिलकुल साफ़ दिख रहा था तब हि मैने देखा कि मौसि मेरे लनद को बहुत गौर से देख रहि थि मुझे आभास हो गया कि आज मौसि को चोदने को मिल जायेगा पर थोदे देर बाद हि मेरे अरमानो पे पानि फ़िर गया मासि ने आगेय बद कर कुच देर धयान से देखने के बाद लुनगि को मेरे लनद पर दाल दिया और फ़िर अपने रूम मे चलि गयि मैन मन मसोस कर रह गया दूसरे दिन दिन भर नोरमल रहा पर एक बात नोत कि मैने देखा कि आज मौसि मुझे अज़ीब सि नज़रोन से देख रहि थि आज रात को मैने सोने से फले मौसि से कहा कि मौसि पलज़ आज आप मेरे रूम मे सो जाओ कल आपके जाने के बाद बहुत बुरा सपना आया था मौसि सायद मेरे दिल कि बात भाप गयि थि या मेरा 9" का खदा लनद्देख कर उनकि चूत मे भि खलबलि होइ गयि थि उनहोने कहा कि थीक है बेता और रात को मैने आज भि सिरफ़ लुनगि हि फनि थि और आज तो मौसि ने बहुत हि सेक्सि चोती सि निघती निकाल कर फनि थि मगर वो मोति थि तो उनपर अछि नहि लग रहि थि सायद जब मौसि कि नयि नयि सादि हुइ थि तब हि मौसा ने लाकर दि होगि जब वो बहुत सलिम हुअ करति थि अब तो पेत निकल आने कि वझा से वो बहुत ऊनचि हो गयि थि और चूचि के पास वाला हिस्सा भि बहुत उभरा हुअ दिख रहा था कयोन कि चूचि फले कि अपेचा काफ़ि बदि हो गयि थि जिसे वो ज़बरदसति उसमे बानधे हुए थि खैर उनके आने के बाद मैने कहा कि मौसि आज जाइयेगा नहि और यहिन मेरे बगल मे सो जाइये तब मौसि मेरे बगल मे बैथ गयि और अपने पैरोन को फ़ैला लिया वो मेरे बिलकुल सामने बैथि हुइ थि पैर फ़ैलाने से उनकि निघती और उपर खिसक गयि

और जब मैने देखा तो मुझे 440 का झतका लग गया मौसि नीचे कुच भि नहि फने हुए थि उनकि पाव कि तरह उभरि हुइ चूत साफ़ दिख रहि थि मैन उनकि तरफ़ हि देख रहा था और सोच रहा था कि मौसि मेरा हि फ़रमुला मुझपेर आजमा रहि है कल मैने उनको अपना लनद दिखाया था और आज वो मुझे अपनि चूत दिखा रहि है खैर मैन लेत गया और सोने का नातक करने लगा थोदि देर बाद मुझे महसूस हुअ कि कोइ मेरि लुनगि के उपर हाथ फ़ेर रहा है पर मैन वैसे हि लेता रहा तब हि मौसि ने अपना हाथ उनदर घुसेद दिया और मेरा लनद मुत्तहि मे लेकर शलाने लगि जिस्से वो अपनि औकात मे आने लगा पर मैन तब भि वैसे हि पदा रहा और फ़िर मासि ने उसे मुह मे लेकर चूसना सुरु कर दिया अब तो मुझे अपने आप को रोकना बहुत हि मुसकिल हो गया था कयोनकि किसि भि आदमि का लनद जब कोइ औरत अपने नरम और मुलायम होनतोन से चूसति है तो कितना मज़ा आता है यहान तक कि उसकि सिसकियान भि निकलने लगति है पर मैने बहुत बरदासत किया कयोनकि मैन मासि कि आगेय कि कारवाहि देखना साहता था आखिर उनहोने चूस ।।चूस कर मेरा पानि निकाल दिया और फ़िर वहिन चदर से मेरा लनद पोच दिया और अपने रूम मे जकर सो गयि दूसरा दिन भि नोरमल हि रहा आज मैने मासि से कहा कि कल बहुत अछि नीनद आयि थि तब मौसि ने कहा कि बेता आज मैन तेरे बेद पे हि सो जाउनगि तब और अछि नीनद आयेगि और रात को मासि मेरे रूम मे आयि मैने आज उनदेरवेअर भि पहन लिया था मासि रूम मे आयि और फ़िर इधर।।।

उदर कि बातेन करने लगि तब हि वो मेरे करीब आ गयि बोलि कि तुम बहुत घरि नीनद मे सोते हो तुमहे उनदेअरवेअर पहन कर सोना साहिये कल मेरे जाने के बाद बिल्लि आयि थि और तेरि लुनगि तेरे लनद से हति हुइ थि तब वो उसे चात रहि थि अगर कहिन कात लेति तो कया होता? मैन मन हि मन मुसकुरा पदा फ़िर मैने अपनि लुनगि हता ते हुए कहा कि मासि आज मैने निक्कर फना हुअ है आज बिल्लि नहि चात पायेगि तब मौसि ने कहा कि बेता मैन देखुन कि कहिन कल बिल्लि ने दानत के निस्सन तो नहि मारे नहि तो सपतिक हो जायेहा और मेरि लुनगि हता कर उनदेअरवेअर को खीचकर उतार दिया मेरा लनद किसि दनदे कि तरह अकद रहा था और मासि उसे हाथ मे लेकर बहुत गौर से देख रहि थि और धीरे।।।धीरे शला रहि थि जिस्से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था तब वो उसे मुह मे भर कर चूसने लगि तब मैने कहा मासि ये कया कर रहि हो आप मैन आपके बेता के समान हून तब मौसि बोलि कि बेते के समान है तो ले तु मेरा दूध पे और अपनि निघती एक हि झतके से उतार दि उनकि बदि।।।।।।

बदि चूचियान मेरि आनखोन के सामने बिलकुल ननगि थि मैन उसे बहुत जोर से दबाने लगा उनकि बदे।।।बदि चूचियान हाथ मे नहि आ रहि थि मैन अपने दोनो हाथ से उनकि एक चूचि दबा रहा था और एक चूचि कि निप्पलस को दानत से कात रहा था जिस्से उनको भि बहुत मज़ा आ रहा था उसके बाद वो बेद पर लेत गयि और उनके पेत कि वझा से उनकि चिऊचियान दाय।।।।बाय धनक रहि थि मैने उनकि चूत पर एक चुम्मा लिया वो जोर से सिसक पदि मैने उनकि चूत चुसायि सुरु कर दि और उनको एक बार झाद दिया फ़िर वो बोलि कि बेता आज मैन तुझे उपर से चोदुनगि तब मैने हाथ जोद लिये और बोला कि मासि मुझे माफ़ कर दो मेरा दुम निकल जायेगा आप इतनि मोति हो तब वो हसने लगि फ़िर मैने कहा कि आपको आज मैन दूसरे सतयले से चोदुनगा जिस्से आपको भि बहुत मज़ा आयेगा वो बोलि चोदो राजा अब तो चूत तुमहारे हवाले है मैने उनको बेद पर हाथ रख कर नीचे खदा किया और पीचे से उनकि चूत मे एक जोरदार धक्का मारा मासि आआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह आआआआआह्हह्हह्हह्ह कि अवाज़ करते हुए बेद पर दह गयि और मैन धक्के लगाने लगा मैन बहुत जोर।।।जोर से उनकि चुदायि कर रहा था और अब वो भि अपनि चुतद को आगेय ।।।

पीचेय कर रहि थि मैने हाथ उनकि बगल से दाल कर भारि।।।भारि चूचियोन को दबाने लगा और फ़िर अपने धक्के कि रफ़तार को बहुत तेज़ कर दिया मेरे धक्के लगाने से मेरे लनद के बहर जो 2 गोलि होति है वो इनकि गानद से तपा।।।।तप तकरा रहा था और मुझे उनकि उभरि हुइ गानद भि बहुत अछि लग रहि थि मैने उसि वकत सोच लिया था कि सालि कि गानद भि ज़रूर मारुनगा और फ़िर मासि आआआआह्हह्हह्हह्हह्ह आआआआआह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्ह ओह्हह्हह्हह्हह्हह करते हुए झद गयि उनकि चूत से बहुत धेर सारा पानि निकला था इतना पानि कभि भि मेरि मुम्मी और रसमि कि चूत से नहि निकला था खैर उसके बाद मैने उस रात 3 बार उनकि चुदायि कि और फ़िर उनकि 14 साल कि लदकि कि चुदायि भि उनहि के सामने कि जिसका किस्सा अगलि बार बताउनगा वो भि बहुत मज़ेदार है अगर किसि को मैल करना हो या सोनतेसत करना हो तो मुझको मैल कर सकता है my id is rajesh_ku53@rediff.com

चुद गयी नौकरनी मुझसे - Chud Gayi Naukrani Mujhse

दोस्तों, लड़की को सीड्यूस करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बस सीड्यूस करने का तरीका ठीक होना चाहिये। मैंने अपनी घर की नौकरानी को ऐसे ही सीड्यूस करके खूब चोदा। अब सुनाता हूं उसकी दास्तान। मेरा नाम है वही आपका अपना जाना पहचाना "होम अलोन" अमित। मेरे घर में उल ज़लूल नौकरानियों के काफ़ी अरसे बाद एक बहुत ही सुन्दर और सेक्सी नौकरानी काम पर लगी। उसका नाम आरती था। 22-23 साल की उमर होगी। सांवला सा रंग था। मध्यम ऊंचायी की और सुडौल बदन, और फ़िगर उसका रहा होगा 33-26-34। शादी शुदा थी। उसका पति कितना किस्मत वाला था, साला उसे खूब चोदता होगा।

बूबस यानि चूंचियां ऐसी कि हाय, बस दबा ही डालो। ब्लाऊज में चूंचियां समाती ही नही थी। कितनी भी साड़ी से वो ढकती, इधर उधर से ब्लाऊज से उभरते हुए उसकी चूंचियां दिख ही जाती थी। झाड़ू लगाते हुए, जब वह झुकती, तब ब्लाऊज के ऊपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा ना पाती थी। एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो पता लगा की उसने ब्रा तो पहना ही नही था। कहां से पहनती, ब्रा पर बेकार पैसे क्यों खर्च किये जायें। जब वो ठुमकती हुयी चलती, तो उसके चूतड़ बड़े ही मोहक तरीके से हिलते और जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबाओ। अपनी पतली सी साटन की साड़ी को जब वो सम्भालती हुयी सामने अपने बुर पर हाथ रखती तो मन करता की काश उसकी चूत को मैं छू सकता, दबा सकता। करारी, गरम, फ़ूली हुयी और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था। काश मैं इसे चूम सकता, इसके मम्मे दबा सकता, और चूचियों को चूस सकता। और इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मज़ा ले सकता। और फिर मेरा तना हुए लौड़ा इसकी बुर में डाल कर चोद सकता। हाय मेरा लण्ड ! मानता ही नहीं था। बुर में लण्ड घुसने के लिये बेकरार था। लेकीन कैसे। वो तो मुझे देखती ही नही थी। बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुयी चली जाती।
मैंने भी उसे कभी एहसास नही होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लीये बेताब है। अब चोदना तो था ही। मैंने अब सोच लिया की इसे सीड्यूस करना ही होगा। धीरे धीरे सीड्यूस करना पड़ेगा वरना कहीं मचल जाये या नाराज हो जायें तो भाण्डा फ़ूट जायेगा। मैंने आरती से थोड़ी थोड़ी बातें करना शुरु किया। एक दिन सुबह उसे चाय बनने को कहा। चाय उसके नरम नरम हाथों से जब लिया तो लण्ड उछला। चाय पीते हुए कहा, “आरती, चाय तुम बहुत अच्छी बना लेती हो”। उसने जवाब दिया, “बहुत अच्छा बाबूजी।”
अब करीब करीब रोज़ मैं चाय बनवाता और उसकी बड़ाई करता। फिर मैंने एक दिन कॉलेज जाने के पहले अपनी कमीज इस्त्री करवायी।
“आरती तुम इस्त्री भी अच्छी ही कर लेती हो।”
“ठीक है बाबूजी,” उसने प्यारी सी अवज़ में कहा। जब घर में कोई नही होता, तब मैं उसे इधर उधर की बातें करता। जैसे,
“आरती, तुम्हारा आदमी क्या करता है ?”
“साहब, वो एक मिल मैं नौकरी करता है।”
“कितने घण्टे की ड्यूटी होती है ?” मैंने पूछा।
“साहब, 10-12 घण्टे तो लग ही जाते है न। कभी कभी रात को भी ड्यूटी लग जाती है।”
“तुम्हारे बच्चे कितने है ?” मैंने फिर पूछा।
'अभी कितने बच्चे है'
शरमाते हुए उसने जवाब दिया, “अभी तो एक लड़की है, 2 साल की।”
“उसे क्या घर में अकेला छोड़ कर आती हो ?” मैं पूछता रहा।
“नही, मेरी बूढी सास है ना। वो सम्भाल लेती है।”
“तुम कितने घरों में काम करती हो ?” मैंने पूछा।
“साहब, बस आपके और एक नीचे घर में।”
मैंने फिर पूछा, “तो तुम दोनो का काम तो चल ही जाता होगा।”
“साहब, चलता तो है, लेकीन बड़ी मुश्किल से। मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बरबाद कर देता है।”
अब मैंने एक इशारा देना उचित समझा। मैंने सम्भलते हुए कहा, “ठीक है, कोई बात नही। मैं तुम्हारी मदद करूंगा।”
उसने मुझे अजीब सी नज़र से देखा, जैसे पूछ रही हो – क्या मतलब है आपका।
मैंने तुरन्त कहा, “मेरा मतलब है, तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ, मैं उसे समझाऊंगा।”
“ठीक है साहब,” कहाते हुए उसने ठण्डी सांस भरी।

इस तरह, दोस्तों मैंने बातों का सिलसिला काफ़ी दिनो तक जारी रखा और अपने दोनो के बीच की झिझक को मिटाया। एक दिन मैंने शरारत से कहा,
“तुम्हारा आदमी पागल ही होगा। अरे उसे समझना चाहिये। इतनी सुन्दर पत्नी के होते हुए, उसे शराब की क्या ज़रूरत है।”
औरत बहुत तेज़ होती है दोस्तों। उसने कुछ कुछ समझ तो लिया था लेकिन अभी तक अहसास नही होने दिया अपनी ज़रा सी भी नाराजगी का। मुझे भी ज़रा सा हिन्ट मिला कि अब तो ये तस्वीर पर उतर जायेगी। मौका मिले और मैं इसे दबोचूं। चुदवा तो लेगी और आखिर एक दिन ऐसा एक मौका लगा। कहते है ऊपर वाले के यहां देर है लेकीन अन्धेर नहीं।
रविवार का दिन था। पूरी फ़ेमिली एक शादी में गयी थी। मैंने पढायी का नुक्सान की वजह बताकर नही गया। कह कर गयी थी “आरती आयेगी, घर का काम ठीक से करवा लेना।”
मैंने कहा, “ठीक है,”
मेरे दिल में लड्डू फ़ूटने लगे और लौड़ा खड़ा होने लगा। वो आयी, उसने दरवाज़ा बन्द किया और काम पर लग गयी। इतने दिन की बातचीत से हम खुल गये थे और उसे मेरे ऊपर विश्वास सा हो गया था इसी लिये उसने दरवाज़ा बन्द कर दिया था। मैंने हमेशा की तरह चाय बनवायी और पीते हुए चाय की बड़ाई की। मन ही मन मैंने निश्चय किया की आज तो पहल करनी ही पड़ेगी वरना गाड़ी छूट जायेगी। कैसे पहल करे ? आखिर में ख्याल आया कि भैया सबसे बड़ा रुपैया। मैंने उसे बुलया और कहा,
“आरती, तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताना। झिझकना मत।”
“साहब, आप मेरी तनखा काट लोगे और मेरा आदमी मुझे डांटेगा।”
“अरे पगली, मैं तनखा की बात नही कर रहा। बस कुछ और पैसे अलग से चाहिये तो मैं दूंगा मदद के लिये। और किसी को नही बताऊंगा। बशर्ते तुम भी ना बताओ तो।”
और मैं उसके जवाब का इनतज़ार करने लगा।
“मैं क्यों बताने चली। आप सच में मुझे कुछ पैसे देंगे ?” उसने पूछा।

बस फिर क्या था। कुड़ी पट गयी। बस अब आगे बढना था और मलाई खानी थी।
“ज़रूर दूंगा आरती। इससे तुम्हे खुशी मिलेगी ना,” मैंने कहा।
“हां साहब, बहुत आराम हो जायेगा।” उसने इठलाते हुए कहा।
अब मैंने हलके से कहा, “और मुझे भी खुशी मिलेगी। अगर तुम भी कुछ ना कहो तो और जैसा मैं कहूं वैसा करो तो ? बोलो मंज़ूर है ?”
ये कहते हुए मैंने उसे 500 रुपये थमा दिये। उसने रुपये टेबल पर रखा और मुसकुराते हुए पूछा,
“क्या करना होगा साहब ?”
“अपनी आंखे बन्द करो पहले।” मैं कहते हुए उसकी तरफ़ थोड़ा सा बढा, “बस थोड़ी देर के लिये आंखे बन्द करो और खड़ी रहो।”
उसने अपनी आंखे बंद कर ली। मैंने फिर कहा, “जब तक मैं ना कहूं, तुम आंखे बंद ही रखना, आरती। वरना तुम शर्त हार जाओगी।”
“ठीक है, साहब,” शरमाते हुए आंखे बंद कर वो खड़ी थी। मैंने देखा की उसके गाल लाल हो रहे थे और होंठ कांप रहे थे। दोनो हाथों को उसने सामने अपनी जवान चूत के पास समेट रखा था।

मैंने हलके से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन लिया। अभी मैंने उसे छुआ नहीं था। उसकी आंखे बंद थी। फिर मैंने उसकी दोनो पलकों पर बारी बारी से चुम्बन लिया। उसकी आंखे अभी भी बन्द थी। फिर मैंने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा। उसकी आंखे बन्द थी। इधर मेरा लण्ड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था। फिर मैंने उसकी ठोड़ी (चिन) पर चुम्बन लिया। अब उसने आंखे खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा, “साहब ?”
मैंने कहा, “आरती, शर्त हार जाओगी। आंखे बन्द।”
उसने झट से आंखे बन्द कर ली। मैं समझ गया, लड़की तैयार है, बस अब मज़ा लेना है और चुदायी करनी है।

मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होठों पर हलका सा चुम्बन किया। अभी तक मैंने छुआ नही था उसे। उसने फिर आंखे खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पलको को फिर ढक दिया। अब मैं आगे बढा, उसके दोनो हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारो तरफ़ लपेट लिया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके कांपते होठों पर अपने होठ रख दिये और चूमता रहा। कस कर चूमा अबकी बार। क्या नरम होठ थे मानो शराब के प्याले। होठों को चूसना शुरु किया और उसने भी जवाब देना शुरु किया। उसके दोनो हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होठों को खूब चूस चूस कर मज़ा ले रहा था। तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूंचियां जो कि तन गयी थी, मेरे सीने पर दब रही थी। बायें हाथ से मैं उसकी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रहा था, जीभ से उसकी जीभ और होठों को चूस रहा था, और दायें हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया।

दांया हाथ फिर अपने आप उसकी दायीं चूंची पर चला गया। और उसे मैंने दबाया। हाय हाय क्या चूंची थी। मलायी थी बस मलायी। अब लण्ड फुंकारे मार रहा था। बांये हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लण्ड को महसूस करवाया। शादी शुदा लड़की को चोदना आसान होता है। क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है। घबराती नही है। ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, ब्लाऊज के बटन पीछे थे, मैंने अपने दांये हाथ से उन्हें खोल दिया और ब्लाऊज को उतार फेका। चूंचियां जैसे कैद थी, उछल कर हाथों में आ गयी। एकदम सख्त लेकिन मलायी की तरह प्यारी भी। साड़ी को खोला और उतारा। बस अब साया बचा था। वो खड़ी नही हो पा रही थी। उसकी आंखे अभी भी बन्द थी। मैं उसे हल्के हल्के से खींचते हुए अपने बेडरूम मैं ले आया और लेटा दिया। अब मैंने कहा, “आरती रानी अब तुम आंखे खोल सकती हो।”
“आप बहुत पाजी है साहब”, शरमाते हुए उसने आंखे खोली और फिर बन्द कर ली। मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया। लण्ड तन कर उछल रहा था। मैंने उसका साया जल्दी से खोला और खींच कर उतारा। जैसे वो चुदवाने को तैयार ही थी। कोई अन्डरवियर नही पहना हुआ था। मैंने बात करने के लिये कहा,
“ये क्या, तुम्हारी चूत तो नंगी है। चड्डी नही पहनती क्या।”
“नहीं साहब, सिर्फ़ महीना में पहनती हू।” और शरमाते हुए कहा, “साहब, परदे खींच कर बन्द करो ना। बहुत रोशनी है।” मैंने झट से परदों को बन्द किया जिससे थोड़ा अन्धेरा हो गया और मैं उसके ऊपर लेट गया। होठों को कस कर चूमा, हाथों से चूंचियां दबायी और एक हाथ को उसके बुर पर फिराया। घुंघराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर। फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूंची को मुंह मैं ले लिया। अहा, क्या रस था। बस मज़ा बहुत आ रहा था। अपनी एक अंगुली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसके बुर में घुसाया। अंगुली ऐसे घुसी जैसे मक्खन मैं छुरी। चूत गरम और गीली थी। उसकी सिसकारियां मुझे और भी मस्त कर रही थी। मैंने उसकी चूत चीरते हुए कहा, “आरती रानी, अब बोलो क्या करूं ?”
“साहब, मत तड़पाईये, बस अब कर दीजिये।” उसने सिसकारियां लेते हुए कहा।
मैंने कहा, “ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान।”
मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा, “साहब, डाल दीजिये ना।”
“क्या डालूं और कहां ?” मैंने शरारत की। दोस्तो चुदायी का मज़ा सुनने में भी बहुत आता है।
“डाल दीजिये ना अपना ये लौड़ा मेरी चूत के अन्दर।” उसने कहा और मेरे होठों से अपने होठ चिपका लिये। इधर मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे। कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता कभी उसके होठों को चूसता। अब मैंने कह ही दिया,
“हां रानी, अब मेरा ये लण्ड तेरी बुर में घुसेगा। बोलो चोद दूं।”
“हां हां, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये।” और वो एकदम गरम हो गयी थी।
फिर क्या था, मैंने लण्ड उसके बुर पर रखा और घुसा दिया अन्दर। एकदम ऐसे घुसा जैसे बुर मेरे लण्ड के लिये ही बनी था। दोस्तों, फिर मैंने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होठों से उसके गाल और होठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया। बस चोदता ही रहा। ऐसा मन कर रहा था की चोदता ही रहूं। खूब कस कस कर चोदा। बस चोदते चोदते मन ही नही भर रहा था। क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। वो तो खूब उछल उछल कर चुदवा रही थी।

“साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खूब चोदिये, चोदना बन्द मत कीजिये”, और उसके हाथ मेरी पीठ पर कस रहे थे, टांगे उसने मेरी चूतड़ पर घुमा कर लपेट रखी थी और चूतड़ से उचल रही थी। खूब चुदवा रही थी। और मैं चोद रहा था। मैं भी कहने से रुक ना सका,
“आरती रानी, तेरी चूत तो चोदने के लिये ही बनी है। रानी, क्या चूत है। बहुत मज़ा आ रहा है। बोल ना कैसी लग रही है ये चुदायी।”
“बस साहब, बहुत मजा आ रहा है, रुकिये मत, बस चोदते रहिये, चोदिये चोदिये चोदिये।” इस तरह हम ना जाने कितनी देर तक मज़ा लेते हुए खूब कस कस कर चोदते हुए झड़ गये।

क्या चीज़ थी, वो तो एकदम चोदने के लिये ही बनी थी । अभी मन नही भरा था। 20 मिनिट के बाद मैंने फिर अपना लण्ड उसके मुंह में डाला और खूब चुसवाया। हमने 69 की पोजिशन ली और जब वो लण्ड चूस रही थी मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया। खास कर दूसरी बार तो इतना मज़ा आया की मैं बता नही सकता। क्योंकि अब की बार लण्ड बहुत देर तक चोदता रहा। लण्ड को झड़ने में काफ़ी समय लगा और मुझे और उसे भरपूर मज़ा देता रहा।
कपड़े पहनने के बाद मैंने कहा, “आरती रानी, बस अब चुदवाती ही रहना। वरना ये लण्ड तुम्हे तुम्हारे घर पर आकर चोदेगा।”
“साहब, आप ने इतनी अच्छी चुदायी की है, मैं भी अब हर मौके में आपसे चुदवाऊंगी। चाहे आप पैसे ना भी दो।” कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसकी चूचियों को हलके हलके मसलते रहे। और मैं उसके गालों और होठों को चूमता रहा। एक हाथ उसके बुर पर चला जाता था और हलके से उसकी चूत को दबा देता था।

“साहब अब मुझे जाना होगा।” कहा कर वो उठी। मैंने उसका हाथ अपने लण्ड पर रखा ,
“रानी एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नही उतारूंगा।' दोस्तों, सच में लण्ड कड़ा हो गया था और चोदने की लिये मैं फिर से तैयार था। मैंने उसे झट से लेटाया, साड़ी उठायी, और अपना लौड़ा उसके बुर में पेल दिया। अबकी बार उसे भचाभच करके खूब चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा। चोदते चोदते पता नही कब लण्ड झड़ गया और मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। चूमते हुए चूचियों को दबाते हुए, मैंने अपना लण्ड निकाला और अन्त में उसे विदा किया।
कैसी लगी ये नौकरानी के सथ मेरी मस्ती भरी चुदायी, सच सच बताना। बताना ज़रूर। मैं इन्तज़ार करूंगा।

मेरा ई-मेल है: amy4ur@yahoo.co.in पर मेल जरूर करना

जो औरत अपनी पास बुझाना चाहती है वो मुझे ई मेल करे मैं दिल्ली में ही हूं।

आप का प्यारा दोस्त अमित

निशा की चुदाई - Nisha Ki Chudai

मेरि एक फ़रिएनद थि उसका नाम था निशा।हुम दोनो एक हि इनसतितुते पे computer course कर रहे थे। वोह थि शरमिलि सि थि।हुमेशा मुझसे दरति थि,एक सिन मेन उसके घर गया वोह अकेलि थि, उसके मुम्मि पपा बहर गये हुवे थे।

उसने मुझसे पुचा कया पियोगे सोफ़त दरिनक या कुच होत।मेन ने कहा मुझे तु होत हि पसनद है तुम मुझे सूफ़े पिला दो।

वोह कोफ़्फ़ी बनने चलि गयि। मेन तव देख रहा था।मेन ने सोचा सद पलयेर ओन करता हून उसमेन आलरेअदी एक सद थि। मेन ने पलय किया तु उसमेन बलुए फ़लिम थि।

मेन ने उस्से जलदि से बनद कर दिया।मेन ने सोफ़्फ़े पि और चला आया घर। मेन ने सोचा निशा तु मुझसे दरति है सेक्स के नाम से बात हि नहि करना पसनद करति तु फिर ये सब कया है।कुच दिन बाद इनसतितुए पे उसने मुझे घर आने को कहा ।

मेन उसके घर गया उसदिन भि वहन पर कोइ नहि था बुस वोह अकेलि थि। मेन ने उस्से सोफ़्फ़े बनने को कहा ।वोह अनदर चलि गयि ।मेन भि उसके पिचे चला गया और उसके पिचे चिपका गया ।मेरा लुनद उसकि गनद से चिपका दिया ।वोह घबरने लगि और अग्गे होने लगि मेन फिर उस्से चिपक ने लगा वोह केहने लगि ये कया कर रहे हू।मेन ने उसको पकद लिया और उसके लिपस पे किस्स करने लगा ,उसने मुझे धक्का दे दिया और कहा ये कया है महेश ये कया कर रहे हू तुम ।उसने मुझसे बहर जाकर बेथ ने को कहा। मेन बहर आ गया और सोफ़्फ़े पिने लगा।

मेन ने उस्से पुचा कि तुम मुझसे इतना कयोन दरति हू ।बलुए फ़लिम कि सद देखति हू।वोह केहने लगि कून सि सद , मेन ने कहा बलुए फ़लिम वोह बोलि ये कून सि होति है मेन ने कहा कि कभि देखि नहि कया तु बोलि नहि ,मेन ने कहा अचा थिक है। और सोफ़्फ़ी पिने लग गया ।कुच देर बाद वोह बोलि तुमने कभि देखि है बलुए फ़लिम मेन ने कहा हान देखि है तु बलि कया होता है उसमेन मेन कहा कुच नहि जैसे दुसरि मोविए होति है वैसि होति है तु मुझसे पुचने लगि कया होता है बतओ ना बहुत जिद्द कर ने लगि मेन ने कहा एक शरत है वोह बोलि कया तु मेन ने कहा मेन तुहैन करके बतता हून कया होता है बलुए फ़लिम मेन तु केहने लगि ओक करो।मेन समझ गया कि ये भि चहति है मुझसे कुच।

फिर मेन धिरे धिरे उसके पस्स आने लगा और फिर उसका हाथ पकद लिया उसने मुझसे कुच नहि कहा धिरे धिरे मेन उसके बूबस दबने लगा उसके बूनस कफ़ि बदे और कदक थे । मुझे भि कफ़ि मजा आ रहा था और उस्से भि ।फिर मेन उसके लिपस पे किस्स करने लगा उसमेन जोश आ गया था।वोह मेरे शिरत के बुत्तोन खोलने लगि लेकिन उस्से बुत्तोन नहि खुल रहे थे तु उसने मेरि शिरत को फ़ाद दिया ।मेन भि पुरे जोश मेन था मेन ने उसका कुरता उअतरा फिर धिरे से सलवा खोलि फिर उसकि बरा को खोला और उसके बूबस को चुसने लगा वोह आआआआआआआआ।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह।आआआआआआआआअ।।।।।।।।।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह।।।।।।।।।।।।।।करने लगि ।फिर मेन ने उसकि चद्दि उतार दि ।वोह केहने लगि इतने देर पेनत खोलने मेन लऊ मेन खोल देति हून। उसने मेरि पेनत का हूक खोला और फिर ज़िप को खिलने लगि मेरा लुनद खला था ।वोह मेरे लुनद को सेहलने लगि और फिर उसने अपने मुह मेन ले लिया और चुस्सने लगि । मुझे कफ़ि मज़ा आ रहा था।कुच देर बाद केह ने लगि आब दलो भि और कितना चूसवऊगे मेन ने लुनद उसकि चुत मेन दला मगर उसकि पुस्सी इतनि तिघत थि कि मेरा लुनद अनदर नहि जा रहा था तु वोह बोलि एक काम करो तुम अपने फ़िनगेर को मेरि पुस्सी मेन दलो। मेन ने वहि किया अपनि फ़िनगेर को उसकि पुस्सी मेन दल दिया।

और अनदर बहर करने लगा कुच देर बाद बोलि आब दलो अपना लुनद तु मेन ने दला उसमेन अपना लौनद मगर फिर भि नहि जा रहा था । मेन ने कोस्सहिश कि और जैसे तैसे अपना लुनद उसकि पुस्सी मेन दला तु वोह जूर से चिल्ला उथि आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआअ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह। मेन दर गया मेन ने कहा चिल्ला कयोन रहि हो ऐसा तु होगा हि ना तु बोलि नहि महेश धिरे धिरे दलो मेन ने कहा वहि कर रहा हून। फिर मेन ने लुनद दला और जूर जूर से शोत मरने लगा।वोह चिल्ला ने लगि आआआआआआआआआआआअ।।।।।।।।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऔऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊउ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।स्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्स।ह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह मेन फिर उसके लिपस पे किस्स करने लगा तकि उसकि आवज़ ना निकले और मेन जूर जूर से शोत मरने लगा।10 12 बार शोत मरने के बाद मेरा मालबहर निकल गया । और मेन उस्से चिपक कर सो गया वोह केहने लगि महेश कया ऐसा होता है बलुए फ़लिम मेन तु मेन ने कहा हान ऐसा होता है तु बोलि आब हुम रोज करेनगे मेन नी उस्से कहा कि जब भि कोइ घर पर नहि हू मुझे बुला लिया करो तु केहने लगि थिक है लेकिन तुम ये किसि को नहि बतना कि हुमने कया किया मेन ने कहा नहि बतऊनगा और घर चला आया और फिर हुमरा ये सिलसिला चलता रहा फिर उसकि शदि हो गयि और वोह मुझसे जुदा हो गयि।

ओक फ़रिएनदस आप को मेरि कहनि केसि लगि मुझे मेरे yahoo id sexyboy_rhere_1981@yahoo.co.in पे मैल करेन या मुझसे चत करके मुझे बतयैन कि आप को मेरि कहनि केसि लगि ओक फ़रिएनदस मेन फिर से जलदि से एक कहनि लेकेर आऊनगा।

माँ और ताउजी की खेत में चुदाई - Ma Aur Tauji Ki Khet Me Chudai

मैं इस साईट की लगभग सारी कहानियाँ पढ़ता हूँ। मुझे सारी कहानियाँ बेहद ही अच्छी लगी। उनको पढने के बाद मैं आपके लिये एक ऐसी कहानी लाया हूँ जिसे मैंने अपनी आँखों के सामने होते हुये देखा था। इससे पहले कि मैं अपनी कहानी को शुरु करूँ, सबसे पहले मैं उन दोनों लोगों का परिचय आपसे करा दूँ।

इस कहानी में दो लोग- कोई और नहीं एक मेरी माँ और दूसरा एक इन्सान मेरे ताऊ जी जिसकी उमर साठ साल की है। यह कहानी वैसे तो कुछ पुरानी है लेकिन मेरे सामने जब भी वो दिन याद आता है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह कल की ही बात है। मेरा नाम राज है हमांरे परिवार में मैं, माँ और पापा हैं। मेरे पापा सेल्समैन हैं, वो कई कई दिनो तक बाहर रहते हैं…।

वैसे भी हमांरे सारे सम्बन्धी गांव में रहते हैं, हम साल में दो या तीन बार जाते हैं। वहाँ हमांरे ताऊ जी रहते हैं, उनकि पत्नी की मौत के बाद वो अकेले ही रहते हैं। हम नवरात्रि में गाँव जाने वाले थे। पापा भी आने वाले थे लेकिन उनको कुछ काम आ गया तब उन्होंने हम दोनों को गांव जाने के लिये कहा।

माँ ने कहा- ठीक है।

तब मैंने देखा कि माँ खुश थी और पैकिंग करने लगी। हम लोग सुबह की ट्रेन से गाँव पहुँच गये। वहाँ ताऊ जी हमें लेने के लिये आये हुये थे। माँ उनको देख कर खुश हो गई और ताऊ जी भी खुश हुए, उन्होने पूछा- परिमल नहीं आया?

माँ ने कहा- उनको कुछ काम आ पड़ा है, वो दो तीन दिन बाद आयेंगे।

और ताऊ जी माँ को देखते रहे और माँ भी उनको देखते रही। मुझे कुछ दाल में काला नजर आया …

हम लोग बैलगाड़ी में बैठे और ताऊ जी ने मुझे कहा- तुम चलाओ।

मैंने कहा- ठीक है।

माँ और ताऊ जी पीछे बैठ गये। थोड़ी दूर चलने के बाद मैंने माँ की आवाज़ सुनी, पीछे देखा तो ताऊ जी का पैर माँ के साये में था और माँ ने मुझ से कहा कि सामने देख कर चलो।

हमें लोग घर पहुंचे तब माँ बाथरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आई……।।

ताऊ जी ने कहा- चलो, तुमको खेत में ले चलता हूँ।

माँ मुस्कुराते हुए बोली- हाँ चलिये।

मैं भी साथ था। हम लोग खेत में पहुँचे तो मैंने ताऊ को जी माँ की गाण्ड पर हाथ फिराते हुए देखा।

तब माँ ने कहा- लड़का इधर है, वो देख लेगा।

उनको पता नहीं था कि मैंने देख लिया था।

तब ताऊ जी ने मुझसे कहा- बेटा, तुम दूर जा कर खेलो। मुझे तुम्हारी माँ से बातें करनी हैं।

तो मैंने माँ को देखा तो माँ ताऊ जी के सामने देख कर मुस्कुरा रही थी और मुझे कहा कि तुम यहाँ से जाओ……।

मैं वहाँ से चलने लगा और माँ-ताऊ जी भी खेत के अन्दर दूर जाने लगे। मुझे दाल में काला नज़र आया। मैं भी उनके पीछे पीछे गया तो देखा कि ताऊ जी माँ की दोनों एक पेड़ की आड़ में चले गये और माँ पेड़ से लग कर खड़ी हो गई। अब ताऊ जी अपना हाथ माँ के साये में डालने लगे और माँ भी अपना साया उठा कर उनका साथ देने लगी। लेकिन मुझे उनकी कोई भी बातें सुनाई नहीं दे रही थी, इसलिये मैं और नज़दीक गया और सुनने लगा। तब वो दोनो पापा की बातें कर रहे थे।

माँ कह रही थी- कितने दिन बाद मुझे यह तगड़ा लौड़ा मिल रहा है, वरना परिमल का लौड़ा तो बेकार है।

अब माँ के बुर को दोनों हाथ से फैलाया। माँ थोड़ा सा विरोध कर रही थी लेकिन उनके विरोध में उनकी हामी साफ दिख रहा थी। इसके बाद ताऊ जी माँ के बुर पर लण्ड सटा कर हलका सा कमर को धक्का लगाया। माँ के मुह से अह्हह्हह्हह्हह की आवाज निकल गई।

मैं समझ गया कि माँ के बुर में ताऊ जी का लण्ड चला गया है। ताऊ जी ने कमर को झटका देना शुरू किया। ताऊ जी जब जब जोर से झटका लगाते थे माँ के मुँह से आआआआआआअहह्हह्हह्हह्ह की आवाज सुनाई पड़ती थी। कुछ देर के बाद जब ताऊ जी ने माँ की चूचियों को मसलना शुरु किया तो उनका जोश और भी बढ़ गया। एक तरफ़ ताऊ जी बुर में जोर से झटके लगाने लगे तो दूसरी तरफ़ माँ के चूचियों को जोर जोर से मसलने लगे।

अब माँ की बुर में लण्ड जब आधे से ज्यादा चला गया तो माँ के मुंह से आआआआआआहह्हह नहीं आआआआआ आह्हह्ह की आवाज आने लगी। ताऊ जी ने माँ के होठों को चूसना शुरु कर दिया। लगभग आधे घण्टे चोदने के बाद ताऊ जी का बीज माँ की चूत में गिरा। माँ भी बहुत ही खुश थी। कुछ देर के बाद ताऊ जी ने लण्ड निकल लिया। माँ पांच मिनट तक लेटी रही।

माँ तब उठ कर जाना चाहती थी। ताऊ जी ने उनको रोक लिया। उन्होने माँ से कहा- कहा जा रही हो?

तब माँ ने कहा- आज के लिये इतना बस !

तब ताऊ जी ने कहा- अभी तो और चुदाई बाकी है, रुक जाओ तुम।

तब ताऊ जी ने माँ के पीछे जा कर माँ की गाण्ड पर लण्ड रखा और कमर को पकड़ कर एक जोरदार झटका मारा। माँ के मुँह से आआआआआ आअह्हह्हहह्हह्हह्हह्ह की आवाज निकलते ही मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में लण्ड चला गया। अब ताऊ जी ने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया और कुछ ही देर में पूरा लण्ड को माँ के गाण्ड में घुसा दिया। ताऊ जी माँ के गाण्ड को लगभद दस मिनट तक मारने के बाद जब धीरे धीरे शान्त पड़ गये तो मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में बीज गिर गया है।

ताऊ जी ने लण्ड को निकाल लिया तब माँ के पैर को थोड़ा सा फैला दिया क्योंकि माँ ने दोनों पैरों को पूरा सटा रखा था। ताऊ जी ने माँ की बुर को देखा, माँ से पूछा- पेशाब नहीं करोगी?

माँ ने गरदन हिला कर कहा- नहीं।

अब ताऊ जी ने जैसे ही लण्ड को माँ की बुर के ऊपर सटाया माँ ने अपने दोनो हाथों से अपनी बुर को फैला दिया। ताऊ जी ने लण्ड के अगले भाग को माँ की बुर में डाल दिया और माँ की चूचियों को पकड़ कर एक जोरदार झटके के साथ अपने लण्ड को अन्दर घुसा दिया।

माँ मुँह से आआआह्हफ़्फ़फ़्फ़फ़ईईरीईईई धीईईईईईई आआआआआह्हह्स इस्सस्सस्स स्सस्हह्हह कर रही थी। ताऊ जी पर उनके इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था। वो हर चार पांच छोटे झटके के बाद एक जोर का झटका दे रहे थे। उनका लण्ड जब आधे से ज्यादा अन्दर चला गया तो माँ ने ताऊ जी से कहा- अब और अन्दर नहीं डालियेगा वरना मेरी बुर फट जायेगी।

ताऊ जी ने कहा- अभी तो आधा बाहर ही है।

माँ ने यह समझ लिया कि आज उनकी गोरी चूत फटने वाली है। माँ की हर कोशिश को नाकाम करते हुए ताऊ जी माँ के चूत में अपने लण्ड को अन्दर ले जा रहे थे। माँ ने जब देखा कि अब बरदाश्त से बाहर हो रहा है तो उन्होंने ताऊ जी से कहा- मैं आपसे बहुत छोटी हूँ आआआआह्हह्हह्हह््लल्लल्लीईईईईज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़। आआआह्हह। नहीईईई उईआआआअह्ह्हह्हह।

ताऊ जी ने लगातार कई जोरदार झटके मार कर पूरे लण्ड को माँ के बुर में घुसा दिया तथा माँ की चूचियों को मसला। अब माँ को भी मजा आने लगा था। शायद माँ को इसी का इन्तजार था। ताऊ जी ने अपने झांट को माँ की झाँट में पूरी तरह से सटा दिया और इस तरह से उन्होंने पूरे पैंतीस मिनट तक माँ की चुदाई की। इसके बाद माँ और ताऊ जी शान्त पड़ गये तब मैं समझ गया कि माँ की बुर में ताऊ जी का बीज गिर गया है। वो दोनो पूरी तरह से थक चुके थे। अब ताऊ जी ने लण्ड को निकाल दिया और माँ की बगल में लेट गये। फ़िर दोनो ने कपड़े पहने और वहाँ से चलने लगे। तब मैं भी वहाँ से हट गया ताकि उनको पता ना चले कि मैंने सब कुछ देख लिया है। हम तीनों घर वापस आ गये।

ताऊ जी माँ को देख कर मुस्कुराने लगे कि तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं पता चला। लेकिन मैंने भी उनको ऐसा ही दिखाया कि मुझे कुछ नहीं पता है।

मेरी दूसरी कहानी आने वाली है कि ताऊ जी ने माँ को हमारे यानि के शहर वाले घर में कैसे चोदा। तो इन्तजार करो दोस्तो।

करज़ एहसान का - Karz Ehsan Ka

hi to all ISS! आज मैं अपको अपने दिदि के चुदै कि एक ऐसि कहनि सुनने जा रहा हु जिसे पधने के बाद अप देखेनगे कि किस तरह से एक अदमि अपने एक एहसन का बदला एक रात उसके साथ चुदै करके चुकता है। इस्से पहले कि मैं अपने कहनि को सुरु करु सबसे पहले मैं अपका परिचय दिदि और उस अदमि से करा दु जिसके बरे मे मैं अपने इस कहनि मे बतने जा रहा हु। मेरि दिदि एक ऐसि लदकि है जिसे देखने के बाद एक बुधे अदमि को भि अपनि जवनि लौत के अ जति है। मेरि दिदि कि तब उमर उनतिस साल कि थि। और वो अदमि जिसके बारे मे मैं बतौनगा उसकि उपर पचपन साल कि है। वो पदोस मे हि रहता था। वैसे तो उसे सोसिएती मे लोग बहुत हि परेम करते है और कभि इजत करते है। एक दिन दिदि जब रात को कुछ लेत आ रहि थि तो रसते मे दिदि को कुछ बदमस अपने गदि मे बैथने वले थे कि वो उसि समय वहा अगये और दिदि को उनसे छुदया।
उस घतना के दो महिने के बाद कि ये कहनि है। उस दिन दिदि को अपने ओफ़्फ़िसे के एक परति मे जना था। मैं अपने दोसत के यहा किसि जरुरि कम से जना था। मैं कयोकि रूम से बाद मे निकला सो रूम कि चभि मेरे पाश हि था। रात मे मुझे अने मे देर हो गयि। मैं जब वहा से चला तभि बरिश होने लगि। जब मैं अपने सोलोनी मे पहुचा तो दिदि को उनसले के दरवजे पर खदा पया। दिदि को वहा देखा तो मेरे मन मे बदमशि सुझि मैने सोचा कि देखता हु कि दिदि कया करति है मैने देखा कि रूम का दरवजा खुला और दिदि अनदर चलि गयि। अब रूम का दरवजा बनद हो गया। उस वकत रात के आथ बज रहे थे। उस समय भि बरिस हो रहि थि।मैं अब ये समझ गया कि आज रत जो कुछ भि होने जा रहा था वो उस अदमि के लिये बिलकुल हि रनगिन रात होने जा रहा था।मैं अब उस रूम के ओर गया जहा दिदि बैथि हुयि थि। दिदि को कफ़ि थनद लग रहि थि। अब उनसले दिदि के लिये एक गलस्स मे पनि लेके अये। दिदि ने गिलस के पहि को पि लिया। अब उनसले दुसरे रूम मे चले गये। कुछ देर के बद जब उनसले दिदि के पास अये तो दिदि ने उनसे कहा कि अब मुझे निनद आ रहि है तो उनसले ने बोला चलो सोते है। अब वो दिदि के हथ को पकद लिया और दिदि को लेके दुसरे रूम मे ले गया। वहा ले जके दिदि को अब बेद पर लेता दिया। अब दिदि कि अनखे बनद हो गया था। मैं समझ गया कि आज वो अपने एहसन का करज वशुल करने जा रहा था। अब वो दिदि के सनदिल को खोल दिया और दिदि के सदि को उतरने लगा। दिदि के सादि को उतरने के बाद उसने दिदि के सदि को बलसोनी मे हनगर मे दल दिया। अब वो दिदि के सया को खोल दिया। दिदि ने पैनती पहन रखा था। दिदि के सया को उतरने के बाद उसने दिदि के बलौसे को उतर दिया। अब उसने दिदि के पनती को उतर दिया। दिदि के पैनती को उतरने के बाद उसने दिदि एक बरा को खोल दिया। अब दिदि उसके समने बिलकुल हि ननगि पदि हुयि थि। अब उसने दिदि के सरे कपदो को ले जके बलसोनी ने फ़ैला दिया। अब वो दिदि के पास अया और दिदि के तने हुये बूबस को बरि बरि से दबया तो उसका लुनद अपने अप हि लुनगि के बाहर अगया। अब वो अपने अपको और रोक नहि पा रहा था। अब उसने दिदि के चुद को पुरि तरह से देखने के लिये दिदि के दोनो पैरो को फ़ैला दिया। दिदि के जनघो पर बैथ गया। अब उसने अपने लुनद को दिदि के भिनगे हुये चुद पर रख दिया। और दिदि के चुद मे अपने लुनद को घुसने के लिये अपने कमर को धिरे धिरे पुस किया तो मैने देखा कि दिदि के चुद मे उसके लुनद का सोसक चला गया। अब उसने दिदि के कमर को पकद के अपने कमर को जोर से झतका मरा तो दिदि अपने जगह से एक इनच उपा घसक गयि। अब मैने देखा कि दिदि के चुद मे उसका दो इनच लुनद चला गया था। अब वो अपने कमर को हिलने लगा और दिदि के चुचिओ को धिरे धिरे दबने लगा। कुछ देर के बाद उसने एक जोरसे झतका मरा तो दिदि के मुह से आआआह्हह्हह्हह्हह्हह कि अवज निकलि। मैं समझा कि दिदि को होस अगया लेकिन वैसा नहि था। दिदि के चुद मे उसका अधा लुनद चला गया था।अब वो अपने होथो को दिदि के होथो पर रखा और दिदि के होथो को चुसने के साथ हि दिदि एक कमर को पकद के जोर जोर से झतके मरने लगा। अब मैने देखा कि दिदि के चुद मे उसका पुरा लुनद चला गया था। अब मैने देखा कि दिदि के दोनो पैरो को फ़ोलद कर के दिदि के पैरो को फ़ैला दिया और अब वो बैथ गया और जोर जोर से झतका मरने लगा और दोनो चुचिओ को मसलने लगा। लगभग बिस मिनुत के बाद उसने जब अपने होथो से दिदि के होथो को चुसने के लिये दिदि के होथो के उपर अपने होथो को रखा तो मैं समझ गया कि उसका सपुरम दिदि के चुद मे गिरने वला था कयोकि वो दिदि के चुद मे जोर जोर से झतके मर रहा था। कुछ देर के बाद वो सनत पद गया। कुछ देर के बाद वो दिदि के उपर से हत गया और दिदि को अपने बहो मे कसते हुये सो गया।
भोर मे जब मेरि निनद खुलि तो मैने देक्कहा कि वो दोनो वैसे हि सोये हुये थे। अचनक दिदि कि निनद खुलि तो वो अपने अपको उसके बहो मे ननगि अवसथा मे देखा तो समझ गयि। वो भि जग गया था। अब उसने दिदि के गल पर एक चुमा लिया। अब वो दिदि के गनद को अपने तरफ़ करने कहा तो दिदि ने बिना कुछ कहे अपने पिथ को उसके तरफ़ कर दिया। अब वो उथ के दिदि के गनद मे अपने लुनद को दलने के लिये सबसे पहले दिदि के गनद पर अपने लुनद को रगदा तो मैने देका कि दिदि के गनद पर उसके लुनद का पनि छुत गया। अब उसने दिदि के गनद को गिला कर दिया। अब दिदि ने अपने गानद को अपने हथो से फ़ैला दिया। उसने अपने लुनद को दिदि के गनद मे दलने के बाद उसने दिदि के कमर को पकद के जोर जोर से तिन झतके मरा तो दिदि पुरि तरह से चतपता उथि। अब दिदि ने अपने कमर को खिचने लगि तो वो दिदि के उपर चध गया। और दिदि के गनद मे अपने लुनद से पुमपिनग करने लगा। कुछ देर के बाद दिदि सनत पद गयि। वो दिदि के उपर चध के दिदि को बिस मिनुत तक पेलता रहा तब वो सानत हो गया। कुछ देर वैसे हि पदे रहने के बाद वो दिदि के उपर से हत गया।
अब दिदि को सिधा करने के बाद दिदि के पैर को हलका सा फ़ैलया तो दिदि ने बोला कि पेशब लगि है। वो दिदि को लेके बाथरूम मे गया वहा से जब वपस अये तो मैने देखा कि दिदि ने अब उसके लुनद को अपने मुथि मे पकद रखा था। अब दिदि बेद पर लेत गयि। अब उनसले ने एक दिबे को लेके अये और दिदि के कमर के पास रखा । अब दिदि के चुद मे तेल लगने लगे तो दिदि ने भि अपने हथो मे तेल ले के उसके लुनद मे तेल लगने लगि। तेल लगने के बाद वो दिदि के जनघ पर बैथ गये अब दिदि ने अपने चुद को फ़ैला दिया। उसने अपने लुनद को दिदि के चुद पर सता के जोर से झतका मरा तो दिदि के मुह से आआआआआआआआआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़ कि चिख को सुन के समझ गया कि दिदि के चुद मे उसका लुनद चला गया अब उसने दिदि के चुचिओ मे तेल लगने के बाद चुचिओ को मसलने के साथ हि दिदि के चुद मे अपने लुनद को अनदर और अनदर ले जने के लिये जोर जोर से झतके मरने लगा। दिदि उसके हर एक झतके का जबब आआआह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह आआआआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह न्नन्नन्ननाआआआआआईईईईईईईईईईईई धीईईईईईरेरीईईईईईईए आआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊउम्मम्मम्मम्मम्मम आआआआआआह्हह्हह्हह्हह कि अवज निकल रहि थि। कुछ देर के बाद जब उसके का कुछ भग अनदर चला गया तो उसने दिदि से पुछा कैसा लग रहा है तो दिदि ने अनखे बनद कर के मुसकुरते हुये अपने गरदन को हिला कर हा मे जबब दिया। इतना सुन के उसको फ़िर से जोस आया और उसने जोर से झतका मरा तो दिदि पुरि तरह से सिहर उथि।अब दिदि के चुद मे उसका पुरा दनदा चला गया था। दिदि कुछ देर के बाद मदहोस भरि अनदज़ मे अवज निकलने लगि जिस्से उसका जोस और बधने लगा। उसने दिदि के चुद मे अपने पुरे लुनद को घुसने के लिये एक जोर का धका मरा तो दिदि छतपता उथि और आआआह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह आआआआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह न्नन्नन्ननाआआआआआईईईईईईईईईईईई धीईईईईईरेरीईईईईईईए आआआआअह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊउम्मम्मम्मम्मम्मम आआआआआआह्हह्हह्हह्हह कि अवज के सथ अपने चुद को सहलने लगि। तब उसने बोला बस और पच मिनुत कि बात है। इतना कहते हुये उसने दिदि के चुचि को अपने मुह से लेके चुसने लगा और अपने कमर को हिलने लगा। दिदि भि कुछ देर के बाद मज़ा लेने लगि।
मुझे अपने उनतिस साल कि जवन दिदि को पच्चपन साल के सनध से चुदते देख के बहुत हि मजा आ रहा था। कुछ देर के बाद उसने दिदि के होथो को चुसना सुरु किया तो दिदि भि उसका खुल के सथ देने लगि। मैं समझ गया कि अब दोनो पुरे सबब पर है। दिदि अपने दोनो जनघो को फ़ैला रखा था। अब उसका पुरा लुनद दिदि के चुद मे चला गया था। दिदि अपने हथो को उसके पिथ पर रगर रहि थि और वो दिदि के दोनो चुचिओ को मसलते हुये चोद रहा था। इस तरह से दिदि अपने करज को उतरवा रहि थि।
कुछ देर के बाद दोनो सनत पद गये तो मैने समझ लिया कि दिदि अब पुरि तरह से उसकि रखैल बन गयि थि।
दस मिनुत के बाद वो दिदि के उपर से हत गया। दिदि कि चुद को देख के ऐसा लगता था कि जैसे रात भर कुतै किया गया हो। कुछ देर के बाद दिदि उथ के अपने कपदो को पहन के तैयर हो गयि तो मैं वहा से हत गया। कुछ देर के बाद मैं दरवजे कि घनति बजै।दिदि ने दरवजा खोला।उनहोने पुछा कि कब अये तो मैने बतया कि अभि अया हु। मैने उनसे पुछा कि आप कब अयि तो उनहोने बतया थोदे देर पहले हि।
हम दोनो अब अपने रूम पर चले गये। उस रोज मैं दिन भर उस रात के चुदै के बरे मे सोचता रहा। लेकिन दिदि को इस बात का पता नहि चलने दिया कि मैने उनकि चुदै को देखा है।

फिर तेरी कहानी याद आई - Pfir Teri Kahani Yaad Ayee

सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। अपनी कहानी या आप बीती बताने से पहले मैं स्वय का परिचय देना उचित समझता हूँ। मेरा नाम अरिन्दम है, मैं कोलकाता से हूँ। मैं विज्ञान में ग्रेजुएट हूँ।

कोई हादसा बताने से पहले उसका वातावरण और परिस्थितियां बताना आव्श्यक होता है, नहीं तो कहानी समझने में परेशानी होती है।

ये उस समय की बात है जब मैंने अपनी सीनीयर सेकेन्ड्री की परीक्षा दे कर कॉलेज में दाखिल हो चुका था।

मैं एक किराये के मकान में रहता था जो मेरे मौसा का ही था। हमारा खुद का मकान तब तक बन कर तैयार नहीं हुआ था। इस मकान में हम तीन लोग रहते थे। मैं पापा और मां दूसरी मंजिल पर रहते थे और मौसाजी चौथे फ़्लोर पर रहते थे। मौसा का रिश्ता हमारे से करीब का रिश्ता था। मौसा की बेटी मुझसे दो साल छोटी थी। उसके साथ मेरा ताल मेल अच्छा था। वो मेरी बहन भी थी और एक अच्छी दोस्त भी थी।

मैं उसे अपनी दिल की कर एक बात बताता था। वो मेरी हर बात को ध्यान से सुनती थी। पिन्की रूपा की करीब की सहेली थी मतलब बेस्ट फ़्रेन्ड थी, जो रूपा के साथ एक ही क्लास में पढती थी। पिन्की बहुत खूबसूरत थी ये तो मैं नहीं कहूंगा। लेकिन उसमे कोई बात थी, कोई कशिश थी जो मेरे दिल को छू जाती थी। स्कूल से छूटने के बाद वो रोज ही मिलने के लिये हमारे अपार्टमेन्ट में आती थी, क्यूंकि रूपा के साथ रिश्ता बहुत अच्छा था। हम तीनो ही कभी कभी मूड होने पर खूब गप्पे मारते थे। कभी मौका मिलने पर मैं उन दोनो के साथ सिनेमा देखने भी जाता था।

इतना सब कुछ होने के बाद भी मैं पिन्की के साथ खुल कर बात नहीं कर पाता था। धीरे धीरे मुझे महसूस होने लगा था कि मैं उसे प्यार करने लगा हूँ। मैं अपने दिल की बात पिन्की को बताऊ, उससे पहले मैंने रूपा से पूछ लेना उचित समझा। इसलिये एक दिन मैंने साहस करके अपने दिल की बात रूपा को बता दी। पहले तो वो सुन कर हंस पड़ी, फिर सम्भलते हुये बोली - ये बहुत ही अच्छी बात है। फिर उसी से मुझे पता चला कि पिन्की भी मेरे बारे में रूपा से पूछताछ करती है। रूपा ने मुझे खुद ही आगे बढ कर प्यार का इजहार करने की सलाह दी।

उसने बताया कि ये काम तो वो भी कर सकती है लेकिन मेरे स्वयं को पिन्की को जाकर बताने से इसका असर बहुत अच्छा होगा। रूपा की सलाह के मुताबिक मैंने एक दिन अपनी हिम्मत जुटाई और हमारे अपार्टमेन्ट के नीचे जाकर खड़ा हो गया और फिर पिन्की के आने का इन्तज़ार करने लगा। पर हाय रे दिल ! मैंने जैसे ही पिन्की को देखा मेरी जबान सूखने लगी, तालू से चिपक कर रह गई। पसीना निकल पड़ा। अब तो वो मेरे बिलकुल नजदीक आ चुकी थी। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा। मेरी हालत देख कर पिन्की हंस पड़ी और नीचे खड़े होने की वजह पूछने लगी।

मुझे पता था कि ये प्यार के इजहार करने का सुनहरा मौका था। लेकिन मैं अन्दर से इतना बौखलाया हुआ था कि मैंने अपना यह सुनहरा मौका गवां दिया। मेरे मुख से निकल पड़ा - वो ,मेरा एक दोस्त आने वाला है इसलिये मैं उसके इन्तज़ार में नीचे खड़ा हूँ।

मेरे हकला कर बोलने से पिन्की फिर से एक बार और हंस पड़ी। मेरी हालत ये थी कि मैं तो अपनी तक भी उससे नहीं मिला पा रहा था।

मैंने बाद में रूपा को जो जो हुआ था सब बता दिया। उसे भी एक बार तो हंसी आ गई। फिर बोली उसे ये बात पता है, पिन्की ने उसे ये सब खुद बताया था। मुझे बेहाल देख कर रूपा ने फिर से कोशिश करने की सलाह दी।

देखते देखते तीन महिना गुज़र गया लकिन मैं हिम्मत नहीं जुटा पाया। इसी दौरान हमारा खुद का मकान पूरा बन चुका था। हम लोग नये घर में जाने की तैयारी कर रहे थे। एक रविवार के दिन मैं, मां, रूपा मौसा और मौसी मिलकर घर का कुछ सामान और गृह प्रवेश काकुछ सामान भी लेकर नये वाले घर में गये। पापा हर रविवार को दादा, दादी, चाचा और चाची से मिलने के लिये अपने गांव जाया करते थे, इसलिये वो हमारे साथ नहीं थे।

उस रविवार को मेरे घर पर मेरा एक दोस्त आने वाला था, इसलिये मैं सामान रख कर जल्दी ही वहां से निकल गया था। तभी यकायक मेरे मन में एक ख्याल आया कि रूपा और मौसी का तो नये घर में आने का कार्यक्रम तो सवेरे हू बना था। पिन्की को तो ये पता नहीं था। वो तो हर दिन की तरह आज भी रूपा से मिलने जरूर आयेगी। इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना है। मैंने अपने दोस्त को फोन कर दिया कि मुझे आज नये घर मेजाना है इसलिये सोम वार को आना।

घर पहुंचते ही मुझे लगा कि यh मौका सुनहरा है। मैं ये मौका मिलने से बहुत रोमांचित होने लगा था। मौका को हाथ में लेने के लिये और प्यार का इजहार करने लिये मैं अपने आपको अलग ढंग से तैयार भी करने लगा। लेकिन जैसे ही पिन्की के आने का समय नजदीक आने लगा मेरा कोंफ़ीडेन्स बढने के बजाय डगमगाने लगा। इसी समय किसी के ऊपर आने की आवाज सुनकर मैंने दरवाजे के होल पर आंख लगा दी। देखा तो पिन्की रूपा से मिलने के लिये ऊपर ही आ रही थी। जैसे ही वो ऊपर चली गई तो मैं अपना दरवाजा खोल कर उसके लौटने का इन्तज़ार करने लगा।

कुछ समय बाद वो नीचे उतर कर आई तो मुझे देख कर उसने मुझे रूपा के बारे में पूछा। तो मैंने उसे कि वो मेरे पापा और मम्मी के साथ नये घर में गई हुई है। पिन्की जैसे ही पीछे मुड़ कर लौट जाने के लिये मुड़ी तो मैंने उसे कहा कि वो मेरे घर पर रूपा का इन्तज़ार कर ले। पहले तो ना करने लगी, पर मैंने उसे थोरा सा जोर दिया तो वो मान गई।

घर में घुसने के बाद मैंने उसे सोफ़ा पर बैठा दिया और खुद भी उसके सामने बैठ गया। पहले तो हम चुपचाप ही बैठे रहे, वो भी खामोश थी और मैं भी । फिर पिन्की ने ही पूछा कि मैं खामोश क्यू बैठा हूँ। जवाब में मैं हिचकिचा गया और मुझसे कोई जवाब नहीं देते बना।

कुछ देर बाद उसने मुझे एक गिलास पानी के लिये कहा। मैं उठ कर पानी लेने चला गया और मन ही मन में सोचा कि जब वो पानी पीने के बाद गिलास वापस देगी तो मैं उसका हाथ पकड़ लूंगा और प्यार का इजहार कर दूंगा। फिर मैंने वैसा ही किया और गिलास लौटाते समय मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और मैंने उसे प्यार का इजहार कर दिया। इसके बाद हामरी बीच की बातचीत कुछ इस तरह से हुई।

मैं : पिन्की, मैं तुम से प्यार करता हूँ। क्या तुम भी मुझ से प्यार करती हो?

पिन्की : पता नहीं

मैं : देखो तुम कुछ तो बोलो ,तुम तो मुझे जानती हो, इस लिये प्लीज जो भी कहना हो मुझे बता दो।

यह बात सुनकर वो कुछ देर तक खमोश रही ओर उसके बाद उसने मेरे मन की बात ली और फिर वो मान गई। उसने बताया कि वो भी मुझसे प्यार करती है।

उसके बाद मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और उसके होंठो को चूमने लगा। पांच मिनट तक हम एक दूसरे को जोश के साथ चूमते रहे। फिर मुझे ख्याल आया कि हमारे रूम की खिड़की खुली है। इसलिये मैं पिन्की को लेकर बेड रूम में चला गया।

पिन्की शर्माती और सकुचाती सी मेरे साथ चल पड़ी। मैंने उसे बेड पर लेटा दिया। वो झिझकती हुई बेड पर लेट गई। मैं भी धीरे से उसकी बगल में लेट गया। वो शर्मा कर मेरे से लिपट गई और मेरी छाती पर उसने अपना मुँह छुपा लिया। मैंने उसका चेहरा ऊपर करके उसे चूमना शुरू कर दिया था। उसकी सांसे उत्तेजना के मारे जोर जोर से चलने लगी थी। मैं समझ गया था कि वो भी मेरी तरह गरम हो चली है। मेरा लण्ड भी उसे चोदने के बेताब हो चला था। उसे खुली किताब की देख कर मेरा मन उसे चोदने को हो उठा । पर तभी मेरी नजर घड़ी पर पड़ी। मैं चौंक गया और झटपत उठ गया। पापा के लौटने का समय हो गया था। वो असंजस निगाहों से मुझे देखने लगी कि ये क्या हो गया । मैंने पिन्की को समझा दिया। हमारे प्यार का सफ़र बीच में ही रुक गया।

उस दिन के बाद मैं और पिन्की छुप छुप कर घूमने जाया करते थे। कभी कभी रूपा भी हमारे साथ हो लेती थी।