Wednesday, 31 October 2012

सुबह की नमस्ते - Subah Ki Namste


सुबह की नमस्ते
प्रेषक : राहुल वर्मा

मैं और मेरे चाचा-चाची पास-पास रहते हैं, मेरे चाचा को शादी के तीन साल हो चुके हैं लेकिन चाची के बड़े-बड़े स्तन देखकर मादरचोद लण्ड में ताकत सी आ जाती थी, उनकी उम्र उस समय लगभग 26 साल थी लेकिन देखने में वो 21 साल की लगती थी।

मेरे चाचा को अक्सर ऑफिस टूर से हर 3-4 महीने बाद बाहर जाना पड़ता था, वो किराये के कमरे में रहते थे इसलिए वे चाची को अकेला नहीं छोड़ना चाहते थे तो वे मुझको उनके घर पर रुकने को कहते थे।

सच बताऊँ तो यह सुनकर तो मेरे मन में लड्डू फूटने लगते थे,लेकिन एक परेशानी थी कि क्या चाची भी वही चाहती है जो मैं चाहता हूँ, यह मुझे नहीं पता था।

लेकिन मैंने ठान रखा था कुछ भी हो चाची की जवानी का रस तो ज़रूर लेना है।

मैं रोज चाची के घर में सोता था मगर हिम्मत नहीं हो पा रही थी कि कुछ करूँ !

और फिर चार दिन बाद चाचा जी वापस आ गए तो लगा यार, अपनी किस्मत ही झंड है.

फिर 4 महीने बाद चाचा का फिर से टूर लगा तो ठान लिया कि कुछ भी हो इस बार ज़रूर कुछ करना है।

और दशहरे के एक दिन पहले की बात है मुझे जोर की मुताश लगी तो मैं मूतने के लिए उठा, मैंने बत्ती जलाई तो जो मैंने देखा वह देखकर मैं दंग रह गया !

चाची सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में सो रही थी क्योंकि उनको गर्मी बहुत लगती थी।

यह देखकर तो मेरा 6 इंच लण्ड नाग के जैसे फुफकारने लगा लेकिन मैं पहले पेशाब करने गया फिर जब मैं वापस आया, तब तक मेरी नींद उड़ चुकी थी और मेरी अन्तर्वासना जागने लगी।

मैं चुपचाप उनके बगल में जाकर लेट गया और धीरे से उनके पीछे पूरे शरीर से चिपक गया और फिर मैंने धीरे से उनकी ब्रा का हुक खोल दिया। यह सब करते हुए मेरे पूरे शरीर में कंपकंपाहट हो रही थी लेकिन मैंने हिम्मत करते हुए उनकी चूचियों पर धीरे से हाथ रखा और लगभग एक मिनट तक हाथ रखा रहा ताकि उनको यह न लगे कि उनके साथ कुछ हो रहा है।

फिर मैंने अपने हाथ उनके पैरों की तरफ बढ़ाये और धीरे से उनको पेटीकोट को ऊपर किया तो मैंने देखा की वो पैंटी भी नहीं पहने थी। पहले तो मेरा लण्ड सिर्फ खड़ा था लेकिन अब तो मेरे लण्ड से पानी आ गया।

लेकिन मैं अपने मिशन को पूरा करने के फ़िराक में था तो मैंने धीरे से उनकी जांघों के बीच में हाथ रखा और उनकी टांग को हल्का सा ऊपर उठाकर मैंने अपना लण्ड उनकी चूत में लगा दिया।

लेकिन चाची झटके से उठ गई और कहने लगी- यह तुम क्या कर रहे हो? तुम्हारे चाचा को पता चलेगा तो वो तुम्हे छोड़ेंगे नहीं !

मैं यह सोचकर सकपका गया लेकिन मेरे दिमाग में अपना ठाना पूरा करने का भूत सवार था तो मैंने चाची से कहा- तुम्हें देखकर तो मुझमें मर्दानगी आई है !

और यह कह कर मैं अपने होंठों को उनके होंठों से मिला कर जोरदार चुम्बन करने लगा और अपने हाथों से उनके मम्मे दबाने लगा जिससे चाची भी प्यार की चरम सीमा पर पहुँचने लगी। फिर वो भी मेरा साथ देने लगी।

फिर मैं लिटाकर उनकी चूत को चाटकर उंगली करने लगा तो चाची के मुँह से आह्ह्ह्ह..... आह्ह्ह की आवाज आने लगी जिसे सुनकर मैं बेकाबू हो गया।

मैंने अपने नाग को बिल में प्रवेश कराया तो आवाज आई.... ओह हो हो... आहह्ह्ह !

मैंने अपने मिशन को आगे बढ़ाया और जोर-जोर धक्के मारने लगा। तब चाची की आवाज आ रही थी- ओह भगवान, ओह माय गाड.......!

फिर चाची बोली- आज तो लग रहा है राहुल तू मेरी चूत फाड़ डालेगा ! सच में आज मुझे सेक्स का असली मज़ा मिला है।

इसके बाद मैंने अपने लण्ड को चाची की चूत में डाले-डाले उनसे चिपक कर पूरी रात बिताई।

सच में उस दिन लगा कि जन्नत वाकई में धरती पर ही है।

फिर सुबह चाची मुझसे बोली- मुझे सुबह की नमस्ते नहीं करोगे?

तो मैंने उनको रात के अंदाज में ही नमस्ते की तो चाची फिर से बहुत खुश हो गई।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे इस पते पर ईमेल करें।

lovegurucul@yahoo.in


जीजा ने मेरा जिस्म जगाया-2 - Jija Ne Jism Jagaya 2


जीजा ने मेरा जिस्म जगाया-2
प्रेषिका : नीना

मैं फिसलने वाले रास्ते पर चलने को चल निकली, उसके घर पहुंच गई।

क्या बड़ा सा मस्त घर था ! वो मुझे अपने कमरे में ले गया, मेरा हाथ पकड़ा अपने दिल पर रख कर बोला- देख रानी, कैसे तेरे लिए धड़क रहा है।

उसने पीछे से कमर में हाथ डाल एक हाथ मेरे मम्मे पर रख बोला- क्या तेरा भी? क्या तेरा तो दाना कूद रहा होगा?

"आप भी ना !"

उसने मुझे लपका और मुझे बिछा मेरे ऊपर सवार होने लगा। पहले कपड़ों के ऊपर से मेरे रेशमी जिस्म का मुआयना किया फ़िर धीरे धीरे मुझे अपने रंग में रंगते रंगते एक एक कर केले के छिलके की तरह मेरे कपड़ों से मुझे आज़ाद किया।

मैं पहली बार ऐसे नजरिये से खुलकर किसी लड़के के नीचे नंगी हुई पड़ी अपनी जवानी लुटवाने को तैयार पड़ी थी।

उसने अपना लौड़ा निकाला और मेरे हाथ में देकर बोला- देखो कितना बेताब है तेरी बेनकाब जावानी देख कर ! देख कैसे हिलौरें खा रहा है !

पहले मुझे अजीब लगा लेकिन जब मैंने शर्म को परे कर उसके लण्ड को सहलाया तो मुझे मजा आने लगा।

उसने थूक से गीली कर ऊँगली को मेरे दाने पर रगड़ी तो मानो मुझे स्वर्ग दिख गया हो।

"मजा आता है मेरी छमक छल्लो?"

"बहुत सतीश ! मुझे बहुत मजा आने लगा है !"

"हाय मेरी जान ! घूम जा !"

उसने लौड़ा मेरे होंठों पर रगड़ा और बोला- खोल दे अपना मुँह !

जैसे ही मैंने मुँह खोला, उसने मेरे मुँह में अपने सख्त लौड़े को घुसा दिया, पहले अजीब सा महसूस हुआ मगर अगले ही पल जब उसकी जुबान मेरे दाने को छेड़ने लगी, चाटने लगी तो मुझे उसका लौड़ा स्वाद लगने लगा।

उसने अपनी जुबान घुसा दी मेरी अनछुई फ़ुद्दी में और घुमाने लगा।

मैं तड़फ कर उसके लौड़े को चूसने लगी, आज पहली बार एहसास हुआ कि यह जवानी छुपानी नहीं चाहिए, इसका आनन्द लेना चाहिए जिसमें इतना मजा है।

कुछ देर की इस काम क्रीड़ा के बाद उसने मेरी चूत आज़ाद की और टाँगे फैलवा कर अपना लौड़ा मेरे छेद पर रख घुसाने लगा।

दर्द से भरा यह मीठा एहसास दर्द को भूल आनन्द को तरजीह देने लगा/

जल्दी उसका लौड़ा खुलकर मेरी चूत में घुसने-निकलने लगा। उसने पास पड़े अपने अंडरवीयर से अपना गीला लौड़ा साफ़ किया और खून साफ़ कर दुबारा घुसा दिया।

"हाय करो मेरे राजा ! बहुत सुख मिलता है !"

"आज से तू मेरी जान बन गई है नीना ! तुझे नहीं मालूम कब से इस पल का इंतज़ार था, तेरे ये बड़े बड़े मम्मे रोज देखता था, जी जल उठता था !"

उसने बातों के साथ साथ मेरी चुदाई नहीं रोकी।

"फाड़ डालो मेरे राजा ! चाहती तो मैं भी थी, बस डर और शर्म मिलकर मेरे कदम रोक देते थे !"

"चल पलट !" उसने मुझे पलटा, मेरी एक टांग उठाई और अपना लौड़ा तिरछा करके दुबारा घुसा दिया। मुझे अपने अंदर गर्म गर्म सा महसूस हुआ, मैं झड़ने लगी थी, जल्दी मेरी गर्मी से उसका रस पिंघल गया और दोनों ने एक दूसरे को कस के जकड़ कर अंतिम पल का खुलकर आनन्द उठाया, अलग होकर मैंने कपड़े पहने।

उसने जाती जाती के होंठ चूम लिए।

"यह सब सही था क्या?"

"हां रानी, क्यूँ नहीं सही था? सब सही था ! जवानी होती है मजे लेने के लिए !"

"मुझे कभी धोखा मत देना !"

"कभी नहीं !"

उसने कार निकाली थोड़ा सा आगे जाकर इधर-उधर देखा और मुझे उतार दिया।

जीजा ने जवान साली के जिस्म को हंसी मज़ाक में अपने स्वाद के लिए जगाया था, उसको सतीश ने आज कुछ देर के लिए सुला दिया था।

घर आई तो जीजा मिल गया।

पता नहीं जीजा इन कामों में कितना हरामी था, बोला- क्या बात है, आज तेरी चाल में फर्क है?

"नहीं तो? तुम भी जीजा जो मर्ज़ी बोलते हो?"

"साली, जिंदगी देखी है ! बोल यार के नीचे लेटकर आई हो ना?"

"शटअप जीजू ! आप भी न !"

"साली कपड़े देख अपने ! आज अंदरूनी कपड़े पहन कर नहीं गई? देख कैसे नुकीले हुए हैं?"

दिमाग में सोचा- हाय ! ब्रा वहीं रह गई थी ! उसने उतार फेंकी थी, शायद बैड के नीचे रह गई !

"उड़ने लगे रंग ना? पार्टी में गई थी या किसी कबड्डी के मैदान में? जाकर कपड़े बदल ले, नहीं तो साफ़ साफ़ पकड़ी जायेगी।"

कहानी जारी रहेगी।

neena.neena91@yahoo.com

चरित्र बदलाव–8 - Charitr Badlav 8


चरित्र बदलाव–8
प्रेषक : अमित अग्रवाल

अन्तर्वासना के पाठकों को एक बार फिर से मेरा प्यार और नमस्कार ! काफी सारे मित्रों के ढेरों मेल मिले, आप लोगों को मेरी जीवन की कहानी इतनी अच्छी लगेगी, मैंने सोचा भी नहीं था। इस बारे में और अपने बारे में ज्यादा बात ना करते हुए मैं अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हूँ। नए पाठकों से निवेदन है कि पहले की कहानी जानने के लिए पहले के सातों भाग

मेरी कहानियाँ यहाँ है !

पढ़ें।

अगले दिन प्रिया भाभी सुबह ही अपने मायके से वापिस आ गई क्योंकि रविवार था, प्रिया भाभी कि छुट्टी थी। शायद थकान के कारण प्रिया भाभी आते ही सीधे अपने कमरे में चली गई। चूँकि सभी सदस्य घर पर थे इसलिए उस दिन प्रिया भाभी से अकेले में बात ही नहीं हो पाई।

मैंने सोचा कि जब प्रिया भाभी अकेले में होंगी तब बात करूँगा, इसलिए मैं शाम होने का इंतज़ार करने लगा। शाम को लगभग सात बजे का समय था, भैया टहलने के लिए बाहर गए हुए थे, मैं मौका पाकर सीधा प्रिया भाभी के कमरे में घुस गया और अंदर से कुण्डी लगा ली।

प्रिया भाभी बिस्तर पर उलटी लेटकर कोई किताब पढ़ रही थी। मैं जाते ही प्रिया भाभी के कूल्हों पर हाथ फेरने लगा तो प्रिया भाभी ने उसका जवाब हँसते हुए दिया और सीधा होकर मुझसे बातें करने लगी।

क्योंकि अंदर से दरवाजा बंद था इसलिए मुझे किसी का डर नहीं था, मैंने अपनी पैंट की ज़िप खोलते हुए अपना लण्ड प्रिया भाभी की तरफ किया और एक बार चूसने को बोला। प्रिया भाभी बिना कुछ कहे हुए मेरे लण्ड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। चूँकि भैया के आने का समय हो गया था इसलिए कुछ देर अपना लण्ड चुसवाने के बाद मैं वापिस अपने कमरे में लौट आया।

अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो देखा कि प्रिया भाभी अभी भी घर पर हैं। मैं हैरान था क्योंकि उस वक्त तक प्रिया भाभी अपनी जॉब पर चली जाती थी। पूछने पर पता चला कि मनीषा और बुआ आज हमारे घर आ रहे थे क्योंकि मनीषा को लड़के वाले देखने आने वाले थे इसलिए प्रिय भाभी ने छुट्टी ले ली थी।

जैसा कि मैंने पहले ही बताया था मनीषा देखने में बहुत ही सुन्दर है और बहुत आधुनिक भी है क्योंकि उसका बचपन अमेरिका में अपने चाचा के यहाँ बीता है। सुबह के करीब दस बजे मनीषा और बुआ हमारे घर आ गए। घर में बहुत से काम होने की वजह से मैं भी कॉलेज नहीं गया।

मैं अपने कमरे में बैठा था, तभी मनीषा मेरे कमरे में आई। जैसे ही मैंने उसे देखा मैं एक पथरा सा गया क्योंकि मैंने उसे तीन साल पहले देखा था और अब वो पहले से भी ज्यादा सुन्दर लग रही थी।

मनीषा ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद किया और मेरे बिस्तर पर आकर बैठ गई और हम दोनों बैठ कर बातें करने लगे।

मनीषा वैसे तो बहुत ही ज्यादा सुन्दर थी मगर उसमें बाकी लड़कियों की तरह घमंड बिल्कुल भी नहीं था। कुछ देर बाद मम्मी ने मुझे बुलाया कि बाजार से कुछ सामान लाना है और मैं बाजार चला गया।

जब मैं वापिस घर आया तो मैं मनीषा को ढूंढने लगा क्योंकि मैं मनीषा की तरफ काफी मोहित हो चुका था। मगर मुझे मनीषा कहीं भी नजर नहीं आई, तो मैं भी अपने कपड़े बदलने के लिये अपने कमरे में चल दिया। कमरे में कोई भी नहीं था इसलिए मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और अपने कपड़े उतार दिए। मैं सिर्फ अंडरवीयर और बनियान में अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुसने लगा।

जैसे ही मैंने बाथरूम के दरवाजे को धकेला तो मैं अंदर का नजारा देखता ही रह गया, अंदर मनीषा नहा रही थी और उसने उस वक्त कुछ भी नहीं पहना हुआ था।

जैसे ही मनीषा ने मुझे देखा तो उसने अपना एक हाथ अपने वक्ष और दूसरा हाथ अपनी चूत पर रख लिया। मगर मनीषा को इस रूप में देख कर मेरी वासना जग चुकी थी और मैं अंदर घुस गया।

मुझे अंदर घुसता देखकर मनीषा इधर-उधर देखने लगी और बिल्कुल चुप हो गई, मनीषा के इस रूप को देख कर मेरा भी लण्ड खड़ा हो चुका था। उस वक्त मैं सिर्फ अन्डरवीयर और बनियान में था इसलिए मेरा खड़ा लण्ड साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा था।

मैं सीधा अंदर घुसा और अपने हाथों से पकड़ कर मनीषा को खड़ा किया और अपनी बाहों में भर कर बोला- मनीषा, आज तुम बहुत ही सेक्सी लग रही हो !

मनीषा फिर भी बिल्कुल चुप खड़ी रही, कुछ नहीं बोली।

मैंने भी अन्तर्वासना के वशीभूत हो मनीषा का चुम्बन ले लिया और काफी देर तक मनीषा को चूमता रहा। मनीषा भी मेरा साथ दे रही थी इसलिए मुझे किसी का डर नहीं था। धीरे-धीरे मैं मनीषा के वक्ष की तरफ बढ़ने लगा और उसका एक चूचा अपने हाथ और दूसरा अपने मुँह में ले लिया। मगर तभी मुझे बाहर से किसी के दरवाजा बजने की आवाज आई, मैंने इस कार्यक्रम को बीच में रोका और बाहर आ गया और बाहर आकर कपड़े पहन लिए।

जब मैंने कमरे का दरवाजा खोला तो देखा कि प्रिया भाभी बाहर खड़ी थी।

भाभी अंदर आकर बोली- दूसरा बाथरूम खाली है, वहाँ नहा लो !

मुझे भाभी के ऊपर बहुत गुस्सा आया मगर मैं कुछ कर भी नहीं सकता था।

कुछ देर के बाद लड़के वाले भी आ गए, मैं उनको नाश्ता कराने लगा।

तभी प्रिया मनीषा को बाहर लेकर आई। मनीषा ने उस वक्त लाल रंग की साड़ी पहनी थी जिसमें वो एक परी सी लग रही थी।

जब बात शुरू हुई तब मुझे पता चला कि लड़का कौन है। लड़के का नाम सुमित था जो वैसे तो बहुत अमीर था मगर दिखने में बिल्कुल पतला सा था।

उसे देखकर मुझे हंसी आने लगी क्योंकि यह तो वही बात हो रही थी "लंगूर के मुँह में अंगूर"

कुछ देर बाद लड़के वाले चले गए और शादी छः महीने बाद की तय हुई क्योंकि लड़का अभी पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहता है।

तभी वो हुआ जिसकी मुझे उम्मीद भी नहीं थी। बुआ ने मेरी मम्मी से जाने की इजाजत मांगी। मैंने भी रोकने की कोशिश की मगर बुआ ने कहा कि उनकी तबियत भी ठीक नहीं है और चित्रा भी घर में अकेली है।

यह सुन कर मेरा दिल भी टूट गया क्योंकि मेरा आगे का सारा कार्यक्रम खत्म हो रहा था।फिर बुआ और मनीषा चले गए और मैं अपने कमरे में आकर लेट गया।

कुछ दिनों तक मैं मनीषा के बारे में सोचता रहा। फ़िर मैंने पढ़ाई की तरफ ध्यान देना ठीक समझा क्योंकि मेरा लास्ट सेमेस्टर था और पेपर भी आने वाले थे। कुछ दिनों तक मैंने अपना ध्यान पढ़ाई में लगाए रखा। मेरे पेपर शुरू होने से कुछ दिन पहले ही भाभी का तबादला दिल्ली से जयपुर (राजस्थान) हो गया। भाभी के तबादले से पढ़ाई में मेरी मदद करने वाला भी कोई नहीं बचा था इसलिए मैं पढ़ाई में ज्यादा ध्यान देने लगा। आख़िरकार कुछ दिनों के बाद हमारे पेपर खत्म हो गए।

हमारे कॉलेज ने किसी कारण से पहले फेयरवेल पार्टी नहीं दी थी मगर उन्होंने हमारे कहने पर एक पार्टी का आयोजन कर दिया और पूरे कॉलेज को उसमें बुलाया। पार्टी खत्म होने के बाद मैं और योगी पार्टी से निकलने लगे कि तभी हमारे कॉलेज की एक लड़की सोनम हमारे पास आई। सोनम हमारे कॉलेज की मिस फ्रेशर भी रह चुकी थी, उसमें आत्मविशवास तो कूट-कूट कर भरा था और देखने में भी बहुत सुन्दर थी।

मगर मैंने कभी उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दिया था क्योंकि वैसे ही मेरे आगे पीछे कॉलेज की काफी लडकियाँ घूमती थी। मैंने सोनम की तरफ इसलिए भी ध्यान नहीं दिया क्योंकि सोनम एक मुस्लिम लड़की थी और उसके तीन भाई भी थे और आप सभी लोग तो जानते ही हैं कि मुस्लिम लड़की को उसकी मर्जी के खिलाफ छेड़ना मतलब मौत को दावत देना !

हमारे पास आकर सोनम बोली- हमारे सारे क्लासमेट जयपुर घूमने जाने का कार्यक्रम बना रहे हैं, क्या तुम दोनों भी चलोगे?

मैं कुछ बोलता, इससे पहले ही योगी ने हाँ कर दी। मैंने भी अपने दिमाग में सोचा कि भाभी भी जयपुर में हैं, उनसे भी मिल आऊँगा और क्या पता इस बार उन्हें फिर से चोदने का मौका ही मिल जाए।

आखिर वो दिन भी आ गया जब हमें जयपुर के लिए निकलना था, हमें सुबह 10 बजे मिलना था मगर सुबह 8 बजे ही सोनम का मेरे पास फोन आया, मुझे लगा शायद जयपुर के टूअर के बारे में कुछ बात होगी मगर हुआ बिलकुल उल्टा, सोनम ने मुझसे पूछा- मैं आज क्या पहनूँ?

मुझे लगा कि सोनम मजाक कर रही है इसलिए मैंने भी मजाक में ही कह दिया- तुम बुरका पहन लो उसमें ही अच्छी लगती हो।

जब मैं दस बजे कॉलेज पहुँचा तो देखा कोई लड़की बुरका पहने खड़ी थी। पास जाकर पता चला कि वो सोनम ही थी। मैं हैरान था क्योंकि जो बात मैंने मजाक में कही थी वो भी सोनम ने मान ली।

जब मैंने यह बात योगी को बताई तो योगी मेरा मजाक उड़ाने लगा और बोलने लगा- लगता है अब तो मुस्लिम भाभी आएगी !

मैं बस में बैठ गया और योगी मेरे पास बैठने के बजाए कहीं और बैठ गया। मेरे साथ वाली सीट खाली देख सोनम मेरे पास आकर बैठ गई और बात करने की कोशिश करने लगी।

आखिर उसने मुझसे वो पूछा जिसके बारे में मैंने नहीं सोचा था, उसने कहा- तुम मुझसे और बाकी मुसलमानों से नफरत क्यों करते हो?

मैंने कहा- मैं नफरत नहीं करता।

तो वो बोली- तो तुम मुझसे बात क्यों नहीं करते? जबकि बाकी पूरे कॉलेज के लड़के मेरे पीछे कुत्ते बने घूमते रहते हैं, तुम्हारा दोस्त योगी भी मेरे पीछे घूमता रहता है। मैं यह सुन थोड़ा हैरान रह गया क्योंकि वैसे तो मैं और योगी एक दूसरे से कुछ नहीं छुपाते थे मगर योगी ने मुझे यह बात नहीं बताई थी। फिर हम दोनों एक दूसरे से काफी देर तक बात करते रहे, बातें करते-करते हम दोनों को ही नींद आ गई।

जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि सोनम मेरे कंधे पर सिर रख कर सो रही थी।

सोती हुई सोनम बहुत ही मासूम लग रही थी, वैसे भी मुस्लिम लडकियाँ बहुत ही मासूम लगती हैं क्योंकि ज्यादातर मुस्लिम लड़कियाँ गोरी तो होती ही हैं साथ ही उनकी आँखें बहुत ही प्यारी होती हैं।

मैं काफी देर तक सोनम को ऐसे ही देखता रहा, सोनम वैसे तो उस वक्त बुरके में ही थी मगर उसके चेहरे पर से नकाब हटा हुआ था।

लगभग शाम के 4 बजे तक हम लोग जयपुर पहुँच गए, मैं प्रिय भाभी को बिल्कुल भूल चुका था और मेरे दिमाग में सिर्फ और सिर्फ सोनम का वो मासूम सा चेहरे घूम रहा था।

हमने एक धर्मशाला में कमरे ले लिए क्योंकि हम कमरों के ऊपर ज्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहते थे। शाम को 8 बजे हम जयपुर की गलियों में घूमने निकले। वहाँ एक जगह कठपुतलियों का खेल चल रहा था। हम सभी वो देखने लगे। उस खेल में दो कठपुतलियों की शादी दिखा रहे थे। मैं वो देख ही रहा था कि सोनम ने बीच में ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे एक तरफ़ चलने को बोला।

जैसे ही हम अलग आये तो सोनम ने मुझे एक लाल गुलाब पकड़ाया और मुझे "आई लव यू " बोलकर मेरे गले लग गई।

मैंने भी सोनम का दिल तोड़े बिना हाँ कह दी और सोनम को शादी का भरोसा भी दिलाया। हम दोनों लगभग दो घण्टे तक अलग ही घूमते रहे और उसके बाद हम धर्मशाला में वापिस आ गए।

जैसे ही हम दोनों कमरे में पहुँचे तो मैंने देखा कि सभी दोस्त वहाँ पहले से ही खड़े थे और सभी मेरी तरफ देख कर हंस रहे थे।

मुझे कुछ भी समझ नहीं आया और जब मैंने सोनम की तरफ देखा तो वो भी हंसने लगी और बोली कि उसने बाकी सभी से शर्त लगाई थी कि वो मुझे शादी के लिए मना लेगी और मैं इतनी जल्दी मान गया।

यह सुन कर मुझे शर्म आने लगी और मैं कमरे से बाहर आ गया और रोने लगा क्योंकि आज तक कभी मुझे कोई भी लड़की शादी लायक नहीं लगी थी और जब लगी तो वो भी मजाक निकला।

तभी किसी ने मेरे नाम से पीछे से आवाज दी। मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो सोनम खड़ी थी।

कहानी जारी रहेगी।

amitcoolwanthot@gmail.com


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चचेरी बहन का कौमार्य-1 - Chacheri Bahan Ka Kaumarya 1


चचेरी बहन का कौमार्य-1
प्रेषक : अमित

दोस्तो, मैं भी अन्तर्वासना की कहानियों को नियमित पढ़ता हूँ, मैंने सोचा मैं भी अपनी कहानी आप सबको बताऊँ। यह मेरी पहली कहानी है, उम्मीद तो यही है कि सभी कुंवारी चूतें फड़फ़ड़ा जायेंगी और मेरे भाइयों के लण्ड फड़क उठेंगे उनको फाड़ने के लिए।

कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर भेजिएगा।

मेरा नाम अमित है, मैं कानपुर में रहता हूँ, मेरी आयु 35 वर्ष है, मैं सेहत में ठीक हूँ और स्मार्ट भी हूँ ! मैं आप सभी को अपने चाचा की लड़की की चुदाई और सील तोड़ने की एकदम सही अनुभव बता रहा हूँ।

मेरे एक चाचा मेरे साथ ही रहते हैं, उनकी एक लड़की है, उसका नाम प्रिया है, मेरी चाची की मृत्यु हो चुकी है। मेरी बहन 18 वर्ष की है परन्तु उसका बदन काफी भरा हुआ है और वह जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी है, हालांकि मेरी शादी हो गई है, पर उसको देख कर दिल में कुछ होने लगता था, जब मैं उसको खेलते हुए देखता, खेलने के दौरान उसके उभरते हुए दूध देखता तो मेरे दिल में सनसनी फ़ैल जाती थी, दौड़ने के दौरान जब गोल गोल चूतड़ ऊपर-नीचे होते तो मेरा लण्ड पैंट के अन्दर मचल उठता था और उसके साथ खेलने (सेक्स का खेल) के लिए परेशान करने लगता था।

क्या कमसिन खिलती हुई जवानी है इसकी ! मुझे अपनी पाँच वर्ष पुरानी बीवी तो बूढ़ी लगने लगती थी। मैं तो जब भी अपनी बीवी को चोदता तो मुझे अपनी बहन का ही चेहरा नजर आने लगता था। हालांकि मेरी बहन मुझसे करीब सतरह वर्ष छोटी है, परन्तु मैं अपनी सेक्स भावनाओं पर काबू पाने में अस्मर्थ था। चूंकि हम लोगों का सम्मिलित परिवार है इसलिए सब एक दूसरे के यहाँ आते जाते थे और एक ही घर में रहने के कारण कभी कभार कुछ ऐसा दिख जाता था कि...

एक दिन मुझे अपनी बहन को नहाते हुए देखने का मौका मिल गया।

हुआ यूँ कि मैं किसी काम से अपने चाचा के घर में गया, मैंने चाचा को आवाज़ दी पर कोई उत्तर न मिलने के कारण मैं अन्दर चलता चला गया, मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। तभी मुझे स्नानघर से पानी गिरने की आवाज़ आई।

मैंने फिर से चाचा को आवाज़ दी तो स्नानघर से प्रिया की आवाज़ आई- भैया, पापा तो ऑफिस चले गए हैं।

मैंने कहा- अच्छा !

और वापस आने के लिए मुड़ गया किन्तु तभी मेरे मन में बसी वासना ने जोर मारा, मैंने सोचा कि प्रिया कैसे नहा रही है, आज देख सकता हूँ क्योंकि चाचा के यहाँ कोई नहीं था और मौका भी अच्छा है।

मैंने स्नानघर की तरफ रुख किया और कोई सुराख ढूढने की कोशिश करने लगा, जल्दी ही मुझे सफलता मिल गई, मुझे दरवाजे में एक छेद नजर आ गया मैंने अपनी आँख वहाँ जमा दी।

अन्दर का नजारा देख कर मेरा रोम रोम खड़ा हो गया, अन्दर प्रिया पूरी नंगी होकर फव्वारे का आनंद ले रही थी।

हे भगवान ! क्या फिगर है इसका ! बिल्कुल मखमली बदन, काले तथा लम्बे बाल, उभरती हुई चूचियाँ, बड़ी बड़ी आँखें, बिल्कुल गुलाबी होंठ और उसकी चूत तो उफ़.... उभरी हुए फांकें और उसके आसपास हल्के हलके रोयें ! उसकी गाण्ड एकदम गोल और सुडौल ! भरी हुई जांघें !

इतना दखने के बाद मेरा तो बुरा हाल हो गया था, जब फव्वारे से उसके शरीर पर पानी गिर रहा था तो मोतियों की बूंदें ऐसे लग रही थी, मेरा तो हाल बुरा हो गया, मैंने बहुत कुंवारी लड़कियों को चोदा था पर इतनी मस्त लौंडिया मैंने कभी नहीं देखी थी।

तभी मैंने देखा कि प्रिया अपनी चूत और चूचियों में साबुन लगा रही है, इस दौरान वो अपनी चूत में अपनी ऊँगली डालने की कोशिश कर रही थी। मेरा लण्ड तो कठोर होकर पैंट के अन्दर छटपटा रहा था, मन में भी यही आ रहा था कि कैसे भी हो प्रिया को अभी जाकर चोद दूँ।

क्योंकि आज के पहले जब मैं उसको कपड़ो में देख कर चोदने के सपने देखता था और आज नंगी देखने के बाद तो काबू कर पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था। तभी मेरा मोबाइल बज गया, यह तो अच्छा हुआ कि मोबाइल वाईब्रेशन मोड में था और घंटी नहीं बजी।

खैर मोबाइल की वजह से मैं धरती पर वापस आ गया और चूंकि यह फ़ोन चाचा का ही था तो मुझे वहाँ से हटना पड़ा।

बाहर आकर मैंने फ़ोन उठाया, तो उधर से चाचा ने पूछा- तुम कहाँ हो?

मैंने कहा- अपने कमरे में हूँ।

तो बोले- अमित, एक काम है।

मैंने कहा- बताइये !

तो वे बोले- आज मुझे ऑफिस से आने में देर हो जायेगी और प्रिया को आज मैंने वादा किया था कि कुछ कपड़े दिलाने बाज़ार ले जाऊँगा, क्या तुम मेरा यह काम कर सकते हो?

मुझे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई थी, मैंने तुरंत कहा- चाचा जी आप परेशान न हों, मैं प्रिय को कपड़े दिला दूँगा।

और उधर से उन्होंने थैंक्स कह कर फ़ोन काट दिया।

इतने में मुझे बाथरूम का दरवाजा खुलने का अहसास हुआ, मैं तुरंत वहां से हट कर अपने कमरे में आ गया। मेरे दिमाग में योजना बननी शुरू हो गई कि कैसे मौके का फायदा उठाया जाए।

फिर मैं थोड़ी देर बाद प्रिया के कमरे में गया, वो अपने बाल सुखा रही थी पंखे के सामने बैठ कर।

मुझे देखते ही तुरंत खड़ी हो गई।

मैंने कहा- प्रिया कैसी हो?

वो बोली- ठीक हूँ भैया।

मैंने कहा- अभी चाचा जी का फ़ोन आया था, कर रहे थे कि आज तुमको शॉपिंग ले जाना था परन्तु आफिस में काम ज्यादा है, उन्हें देर हो जायेगी और तुमको शापिंग मैं करवा लाऊँ। उसने कहा- ठीक है भैया, कितने बजे चलेंगे?

मैंने कहा- तुम तैयार हो जाओ, हम लोग अभी निकलेंगे और दोपहर का खाना भी बाहर खायेंगे क्योंकि मेरी मम्मी बुआ के घर गई हैं और तुम्हारी भाभी (मेरी पत्नी चूंकि टीचर है) तो शाम तक आएँगी, आज मैं शॉपिंग के साथ तुमको पार्टी भी दूँगा।

उसके चेहरे पर चमक आ गई।

खैर मैंने 11 बजे के करीब उसको अपने स्कूटर पर बैठाया और निकल पड़ा बाजार जाने को !

मैंने स्कूटर एक बड़े मॉल में जाकर रोका, तो प्रिया चौंक कर बोली- भैया, यहाँ तो बड़े महंगे कपडे मिलेंगे?

मैंने उससे कहा- तो क्या हुआ, महँगे कपड़े अच्छे भी तो होते हैं ! और फिर तुम इतनी सुन्दर हो, अच्छे कपड़ों में और ज्यादा सुन्दर लगोगी।

तो उसका चेहरा लाल हो गया।

मॉल के अन्दर जाकर कपड़े पसन्द करते समय वो मुझसे बार-बार पूछती रही- भैया, यह कैसा लग रहा है? वो कैसा है?

खैर चार जोड़ी कपड़े चुन करके वो ट्राई रूम में गई। ट्राई रूम थोड़ा किनारे बना था और उस समय माल में ज्यादा लोग थे भी नहीं, मैं ट्राईरूम के बाहर ही खड़ा हो गया।

वो पहन कर आती और मुझसे पूछती- यह कैसा लग रहा है? ठीक है या नहीं?

उसने वो चारों जोड़ी कपड़े पसन्द कर लिए।

उसके बाद मैंने पूछा- प्रिया, और कुछ लेना है?

तो वो बोली- हाँ, मगर वो मैं अकेले ही ले लूंगी।मैंने सोचा ऐसा क्या है, खैर मैंने देखा कि वो महिला सेक्शन में जा रही थी।

उसने कुछ अंडर गारमेंट लिए और जल्दी से पैक करा लिए जब वो लौट कर मेरे पास आई तो मैंने कहा- मैंने तो देख लिया है।

तो वो शर्मा गई।

मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- तुम इनका ट्रायल नहीं दिखाओगी क्या?

तो वो और शरमा गई।

मैंने माहौल को सामान्य करते हुए कहा- मैं तो इसलिए कहा रहा था कि तुम्हारी भाभी को तो यह सब मैं ही ला कर देता हूँ, अगर तुम इसके लिए भी मुझसे कहती तो मैं तुमको अच्छी चीज दिला देता।

बात उसकी समझ में आ गई, वो बोली- भैया गलती हो गई।

मैंने कहा- चलो अभी चलते हैं।

मैं उसको महिला विभाग में ले गया और सेल्स गर्ल से विदेशी अंतर्वस्त्र दिखाने को कहा।

चूंकि प्रिया थोड़ी देर पहले ही उससे कुछ अंतर्वस्त्र लाई थी, अतः उसने उसी नाप के अंतर्वस्त्र दिखाने लगी।

उन अंतर्वस्त्रों को देख कर प्रिया के अन्दर की ख़ुशी मैंने उसके चेहरे से पढ़ ली, मैंने कहा- चलो जाओ और ट्राई करलो !

तो वो चेहरा घुमा कर हंसने लगी।

उसके बाद मैंने उसको मुख-शृंगार का सामान भी दिलवाया अपनी पसंद से !

हालांकि वो मना कर रही थी पर मैंने कहा- यह मेरी तरफ से है।

यह सब खरीदने के बाद हम लोग वहीं एक रेस्तरां में गए। मुझे पता था कि इस समय रेस्तरां में ज्यादातर प्रेमी प्रेमिका ही आकर बैठते थे।

मैंने एक किनारे की सीट चुनी और हम दोनों उसी पर जाकर बैठ गए।

मैंने उससे पूछा- तुम क्या खाओगी?

तो वो बोली- जो आप मंगा लेंगें वही मैं भी खा लूंगी।

मैंने उसको छेड़ते हुए कहा- अंतर्वस्त्र लेते समय तो यह ख्याल नहीं किया? और फिर मेरे कहने पर ट्राई भी नहीं किया?

तो वो शरमा गई और बोली- क्या भाभी आपकी पसंद से लेती हैं? और वो यहाँ पर ट्राई करके दिखाती हैं?

तो मैंने कहा- हाँ ! पसंद तो मेरी ही होती है पर ट्राई करके वो घर पर दिखाती है। क्या तुम मुझे घर पर दिखाओगी?

उसको कोई जवाब नहीं सूझा तो वो मेरा चेहरा देखते हुए बोली- हाँ दिखा दूँगी।

मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। तभी वेटर आ गया और खाने का आर्डर ले गया।

खाना ख़त्म कर हम लोग करीब दो बजे घर आ गए, प्रिया बहुत खुश लग रही थी क्योंकि उसको मेरे साथ शॉपिंग में कुछ ज्यादा ही अच्छा लगा।

शाम को उसने अपनी शॉपिंग का सामान मेरी माँ और बीवी को भी दिखाया पर अंतर्वस्त्र और शृंगार का सामान नहीं दिखाया।

दूसरे दिन सुबह मेरी माता जी को कुछ काम से बाजार जाना था, मेरी बीवी स्कूल चली गई थी, मैं कल वाले समय पर ही चाचा जी के कमरे की तरफ चला गया और मैंने आज पहले ही निश्चय कर लिया था कि आज अपनी प्यारी सेक्सी बहना की कुँवारी चूत की सील तोड़नी हैं।

इसलिए मैं केवल एक तौलिया बांधे था, मेरा अनुमान सही था, चाचा जी ऑफिस जा चुके थे और प्रिया बाथरूम में नहा रही थी।

मैंने फिर से कल वाली पोजिसन ले ली, मैंने देखा कि आज प्रिया की चूत बिल्कुल चिकनी है, शायद उसने अपनी झांटें साफ़ की हैं नहाने से पहले। आज वो अपनी चूत पर हाथ ज्यादा चला रही थी, उसकी चूचियाँ कड़ी कड़ी लग रहीं थी और आँखें बंद थी।

मेरा लण्ड प्रिया की चूत में घुसने के लिए मचला जा रहा था।

कुछ सोच कर मैं वहाँ से हट कर प्रिया के कमरे में चला गया और ऐसी जगह बैठ गया कि वो मुझे कमरे में घुसते ही न देख पाए।

प्रिया थोड़ी देर बाद कमरे में आई, वो अपने बदन को केवल एक तौलिये से ढके थी, कमरे में आते ही वो अपने ड्रेसिंग टेबल की तरफ गई और तौलिया हटा दिया।

उफ़ क्या मस्त लग रही थी मेरी बहना ! उसके शरीर पर यहाँ वहाँ पानी की बूंदें मोती की तरह लग रही थी, चूत एकदम गुलाबी, चूचियाँ बिल्कुल कड़ी, उन्नत गाण्ड देख कर मेरी तो हालत ख़राब हो गई।

उसने कल वाले अंतर्वस्त्र उठा लिए, उनमे से एक को चुना और पैंटी को पहले पहनने लगी।

किन्तु उसको शायद वो कुछ तंग लगी, फिर उसने दूसरी पैंटी ट्राई किया मगर वही रिजल्ट रहा, अब उसने पैंटी छोड़ कर ब्रा उठाई लेकिन ब्रा में भी वही हुआ, उसकी चूचियाँ कुछ बड़ी लग रही थी, ब्रा भी फिट नहीं थी।

अब मुझसे बर्दाश्त भी नहीं हो रहा था, मैंने अपनी जगह से खड़ा हो गया।

मुझे देख कर उसकी आँखें फट गई, वो इतना घबरा गई कि अपनी चूत या अपनी चूची छिपाने का भी ख्याल नहीं आ पाया उसको !

बस फटी हुई आँखें और मुँह खुला रहा गया।

मैं धीरे से चल कर उसके पास गया और कहा- कल अगर मेरी बात मान लेती और ट्राई कर लेती तो तुमको आज यह परेशानी नहीं होती।

अब उसको कुछ समझ आया तो जल्दी से तौलिया उठाया और लपेटने के बाद मेरी तरफ पीठ करके पूछा- भैया, आप कब आये?

मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा- मेरी सेक्सी बहना ! मैं तो तब से यहाँ हूँ जब तुम चाचा जी के रेजर से अपनी झांटें साफ़ कर रही थी।

मैंने ऐसे ही तुक्का मारा।

इस कहानी के तीन भाग हैं !

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भाभी के दूध की चाय - Bhabhi Ke Dudh Ki Chay


भाभी के दूध की चाय
प्रेषक : रोहित

हेलो दोस्तो !

मैं रोहित गुजरात से, 20 साल का हूँ और मैं अपना पहला सेक्स अनुभव आपको बता रहा हूँ।

मेरे परिवार में मैं, मेरे बड़े भाई, भाभी जिनकी अभी शादी के सिर्फ दो साल हुए हैं, उनका एक बेटा है, मेरी बहन सीमा 18 साल की है और मेरे पापा जो काम से हमेशा बाहर ही रहते हैं।

मेरी भाभी सोनी, जिनकी उम्र मुझसे ज्यादा नहीं है, काफी मस्त और चंचल दिखती है और सीमा उससे भी ज्यादा खूबसूरत लगती है।

दोनों के साथ सेक्स करने का मुझे हमेशा ख्याल आता था पर डरता था।

गर्मी का मौसम था, भाई ऑफिस गए हुए थे और बहन स्कूल में !

मेरी भाभी औए मैं घर में थे, मैं कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहा था कि तभी भाभी ने आवाज लगाई, बोली- रोहित, जा दूध ले आ।

मैं दूध लेन चला गया। थोड़ी देर बाद आकर बोला- भाभी, दूध ख़त्म हो गया है, नहीं मिला।

भाभी बोली- ओह, मुझे चाय बनानी थी ! ठीक है, कोई बात नहीं।

फिर मैं कंप्यूटर पर अपना काम करने चला गया।

थोड़ी देर बाद भाभी आई और बोली- लो चाय पी लो।

चाय देख कर मैं चौक गया, चाय दूध वाली थी, मैंने पूछा- भाभी दूध पहले से था क्या?

भाभी बोली- नहीं।

मैं बोला- फिर दूध वाली चाय?

भाभी : बस दूध मिल गया।

मैंने समझ नहीं पाया और मैं जोर देकर पूछने लगा तो भाभी बोली- किसी को बोलेगा तो नहीं?

मैंने : नहीं भाभी, आप बोलो तो।

भाभी : अरे मैं औरत हूँ, मेरे पास हमेशा दूध रहता है।

मैं : मतलब?

भाभी : औरत अपने बच्चे को दूध कहाँ से पिलाती है?

मैं : भाभी आप मुझे अपना दूध पिला रही हो, मैं नहीं पिऊँगा।

भाभी : क्यों स्वाद अच्छा नहीं है क्या? तुम्हारे भैया तो कहते हैं कि बहुत मीठा है। और मैंने तो कई बार इस दूध से चाय बनाई है।

मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था कि मैं क्या बोलूँ।

भाभी : क्या हुआ? शरमा गए?

मैं : भाभी यह आप अच्छा नहीं करती हो।

भाभी : हाँ और तुम तो बड़ा अच्छा काम करते हो हमेशा मेरा पैंटी बर्बाद करके क्या?

मैं : मतलब?

भाभी : भोले मत बनो, मैंने खुद तुम्हें देखा है कि मेरी पैंटी को सूंघ कर मुठ मारते हो और फिर मेरी पैंटी पर ही अपना वीर्य गिरा देते हो।

मैं शर्म के मारे पानी पानी हो गया, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूँ।

भाभी : क्या हुआ? मैं सब जानती हूँ कि तुम हमेशा मेरे बारे में सोचते रहते हो। बोलो, क्या मैं गलत बोल रही हूँ?

मैंने कुछ जवाब नहीं दिया, लेकिन भाभी पूरी खुल गई थी।

भाभी : अरे डरते क्यों हो? जिस तरह तुम मुझे देख कर पागल हो गए हो उसी तरह मैंने जब से तुम्हारा लण्ड देखा है तब से सिर्फ तुम्हारे बारे मैं ही सोचती हूँ।

यह सुन कर तो मानो मुझ में एक नया जोश आ गया और झट से भाभी का हाथ पकड़ कर बोला- भाभी, मैं सच में आपको देख कर पागल हो गया हूँ, मुझे सिर्फ एक मौका दीजिये।

भाभी : ठीक है ! पर किसी को पता नहीं चलना चाहिए।

मैंने भाभी को बाहों में भर लिया और कहा- नहीं पता चलेगा !

फिर मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और पाँच मिनट तक चुम्बन करता रहा।

फिर मैंने उनके गालों पर और इधर उधर चूमना शुरु किया और अपना हाथ उनकी चूची पर रख दिया और जोर से मसलता रहा।

भाभी भी इस सब में मेरा पूरा साथ दे रही थी और पूरा मजा ले रही थी कि तभी दरवाजे की घण्टी बज गई। हम तुरंत अलग हुए, मैं दरवाजा खोलने गया तो देखा कि सीमा आई हि और अब मैं और भाभी यही सोचते रहे कि कब हमें मौका मिलेगा।

शाम को भैया आये और आते ही बोले- मुझे ऑफिस के काम से बंगलोर जाना है, 4-5 दिन में लौट आऊँगा।

यह सुन कर तो मन ही मन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था।

फिर लगभग दस बजे मैं भैया को एअरपोर्ट छोड़ आया, खाना तो भैया के साथ ही खा लिया था सो सीधा हम सब सोने चले गए।

पर मुझे नींद कहाँ आ रही थी, मेरा मन तो कर रहा था कि भाभी के कमरे में चला जाऊँ, पर हिम्मत ही नहीं हो रही थी, कहीं सीमा न देख ले !

तभी मैं मुठ मारने बाथरूम में जाने लगा। बाथरूम के दरवाजे का लोक ख़राब था इसलिए वो हमेशा खुला ही रहता था, मैंने दरवाजा खोला और अन्दर का नजारा देख कर मैं पागल हो गया।

अन्दर सीमा एक अजीब टाइप की लकड़ी लेकर अपने चूत में अन्दर-बाहर कर रही थी।

उसकी आँखें बंद थी इसीलिए उसे पता भी नहीं चला कि मैं उसे देख रहा हूँ।

यह दृश्य देख कर मेरा लण्ड तन कर मेरी लुंगी से बाहर आने को बेताब होने लगा।

इतने में सीमा की आँख खुली और मुझे सामने देख कर चौंक गई। मैंने झट से बिना कुछ पूछे उसे बाहों में भर कर कहा- सीमा, आज मुझे रोकना मत !

और यह कह कर उसके होंठों पर चुम्बन करने लगा और एक हाथ से उसकी चूची दबाने लगा।

कुँवारी चूची होने के कारण वो सोनी के मुकाबले काफी सख्त थी। सीमा ने भी अपने को छुड़ाने की कोशिश नहीं की और मेरा साथ देने लगी।

फिर मैंने उसके शर्ट को उतार दिया, वो सिर्फ ब्रा में थी।

उसे अपनी पैंट और पैंटी पहले से उतारी हुई थी।

फिर मैंने उसे वहीं बाथरूम में लिटाया और उसकी चूची चूसने लगा।

फिर मैंने उसके पूरे शरीर को चूमा और हाथ से सहलाता रहा। उसे काफी मजा रहा था।

फिर मैंने अपनी बनियान उतारी और अपनी लुंगी खोल दी और उसे लण्ड चूसने को कहा।

पहले तो वो मना कर रही थी पर मेरे जिद करने पर वो मान गई।

लण्ड चुसवाना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर मैंने उसकी टाँगों के बीच में बैठ कर अपने हाथों से उसकी चूत को सहलाया और उसे चाटने लगा। उसे भी अपनी चूत चटवाना बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा।

वो झट से घोड़ी बन गई। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा और बोला- सीमा, क्या पहले कभी चुदवाई है?

सीमा : नहीं भैया, मैं पहली बार आपसे ही चुदवा रही हूँ।

मैंने कहा- तो ठीक है ! अब मैं तुम्हारी चूत में अपना लण्ड घुसाने जा रहा हूँ। शुरु में थोड़ा दर्द होगा पर सह लेना।

फिर मैंने धीरे धीरे घुसाना शुरु किया और फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा, मेरा आधा लण्ड उसकी चूत में घुस गया। वो बुरी तरह चीख उठी, मैं डर गया।

मैंने उसे सीधा किया और उस पर लेट गया और उसके मुँह पर अपना मुँह रख कर उसका मुँह बंद किया।

फिर मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड घुसा दिया और फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा। वो पूरे ज़ोर से चिल्लाना चाहती थी पर नहीं चीख पाई।

मैंने इसकी परवाह किये बिना कई धक्के लगा दिए।

अब मेरा लण्ड आराम से अंदर-बाहर होने लगा और सीमा का भी दर्द कम हो गया, उसे भी मजा आने लगा।

फिर मैं लगभग दस मिनट ऐसे चोदता रहा और उसके बाद हम दोनों झड़ गए।

थोड़ी देर हम एक दूसरे से लिपट कर लेटे रहे फिर वो बोली- भैया, आज मुझे बहुत मजा आया ! आप मुझे रोज़ चोदना।

मैंने कहा- क्यों नहीं ! अब मैं तुझे रोज चोदूँगा और ज्यादा अच्छे से चोदूंगा। आज पहली बार था ना इसलिए आज इतना ही।

फिर उसने उठने की कोशिश की पर उठ नहीं पाई। मुझे भी बहुत दर्द हो रहा था, फिर भी मैंने उसे नंगा ही उठाया और उसके कमरे में पहुँचा कर अपने कमरे में आ गया।

आगे की कहानी फिर कभी क कैसे मैंने अपनी भाभी को ठोका और ग्रुप सेक्स भी किया।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, जरूर बताइएगा।

loveguru.rohit1@gmail.com


मौसी से सेक्स ज्ञान-1 - Mosi Se Sex Gyan 1


मौसी से सेक्स ज्ञान-1
प्रेषक : विजयपाल माही

काम के सभी पुजारियों को माही के लहराते लण्ड का सादर प्रणाम।

आपने मेरी कहानी

वो पूस की एक रात

पढ़ी होगी।

अब एक नई दास्ताँ लेकर हाजिर हूँ, सही बताऊँ तो सबसे पुरानी दास्ताँ !

मित्रों काम ही इस संसार का नियामक तत्व है यही बाकी सभी क्रियाओं का मूल है और फ्रायड ने इसे सिद्ध भी किया है।

काम को न तो भाषा की जरूरत है ना काम किसी बंधन की परवाह करता है यह तो प्रकृति की अविरल धारा है जो कभी भी कहीं भी फूट सकती है।

मैं उस समय बीए सेकेंड ईयर में पढ़ता था, उम्र यही कोई अठारह साल थी। उस समय लण्ड का आकार सात इंच हो चुका था। तने होने पर पैंट के ऊपर से इसे साफ़ महसूस किया जा सकता था और सुबह के वक्त तो यह चड्डी को बिल्कुल तम्बू बना देता था इसीलिए मैं हमेशा चादर ले कर सोता था।

गर्मियों की बात थी, मेरी सगी मौसी मेरे घर आई हुई थी। मम्मी की सबसे छोटी बहन.... नाम है निम्मी।

मौसी की शादी पास के ही एक गाँव में हुई थी और मौसा जी खेती करते थे।

मौसी अक्सर किसी न किसी काम से लखनऊ आती थी तो वह हमारे घर जरूर आती थी। पर मैं पिछले कुछ महीनों से देख रहा था कि वो मम्मी से अकेले में बड़ी देर तक अपना दुःख सुनाती थी। मैंने उनको कहते हुए सुना था कि मौसा जी का गाँव की किसी विधवा औरत से चक्कर चल रहा था और वो मौसी में बिल्कुल रुचि नहीं लेते थे। वे अक्सर रात को खेत की रखवाली के बहाने उस औरत के घर पर पड़े रहते थे। मौसी अपनी 12 साल की बेटी के साथ अक्सर घर में अकेले रात बिताती थी।

सच में किसी के पति का लण्ड उसकी सूखी चूत को हरी करने की बजाये किसी गैर औरत की चूत में घुसे, यह उस औरत के लिए अपमान की बात है।

माँ के कहने से मौसी ने मौसा जी को बहुत समझाया, दुआ-तावीज़ भी कराया पर उल्टे कई बार मौसा ने उनकी पिटाई कर दी थी। अब तो मौसी ने जैसे हालात से समझौता कर लिया था, वो कई कई दिन हमारे घर रहती थी, गाँव से आती थी तो एक-आध दिन रुक कर ही जाती।

हाँ वो जब भी मुझे मिलती थी तो पकड़ कर गालों पर बहुत चुम्मी लेती थी, मेरा मुन्ना कह कर ! और मुझे उनकी साँसों की गंध ऐसी बुरी लगती कि मैं उनसे हाथ छुड़ा कर भागता- अरे मौसी, अब मैं बड़ा हो गया हूँ !

यह देख मेरी माँ हंस देती।

ऐसे ही गर्मी की वो रात थी, माँ, पिताजी और मेरा छोटा भाई छत पर खुली हवा में सोते थे, केवल मैं रात देर रात तक पढ़ाई के कारण नीचे सोता था। उस दिन भी देर

रात तक पढ़ कर मैं अपने कमरे में पड़े तख्त पर सो गया।

रात को अचानक मेरी नींद खुल गई जब मुझे लगा कि कोई मेरा हाथ पकड़ कर खींच रहा है। अँधेरे में मैं समझ गया कि यह मौसी थी वो मेरा हाथ खींच कर अपने चूचियों पर रख कर ऊपर से अपने हाथ से दबा रही थी। मेरे बदन में करेंट सा लगा। मौसी अपने ब्लाउज के बटन आगे से खोले थीं, उनके बड़े बड़े चुच्चे मेरी हथेलियों के नीचे थे, उस पर मौसी का हाथ था और वो अपने हाथ से मेरी हथेली दबा दबाकर अपने चुच्चे मसल रही थी और हल्के से कराह भी रही थी।

मेरे लण्ड में आंधी-तूफ़ान चलने लगा, मैं बंद आँख से भी मौसी की खूब गोल-गोल भरी भरी चूचियों को महसूस कर सकता था, कई बार ब्लाउज से आधी बाहर झांकती देख चुका था उनको !

पर आज जाने क्या को रहा था मुझे? कामवासना का भूत मेरे सर चढ़ चुका था। मन तो किया कि ऊपर चढ़ कर मैं खुद मौसी की चूचियों को रगड़ कर रख दूँ और उनकी टांगों को फैलाकर उनकी चूत का सारा रस पी लूँ और उनकी टांगें फैला कर बुर में ऐसा लण्ड पेलूँ कि वो वाह-वाह कर उठें औररात भर अपनी टांगें न मिला सकें। लेकिन मेरे मन में डर था कि कहीं मौसी इतना सब कुछ न करना चाहती हों और वो घर में सब को बता दें तो?

यही सोच कर मैं सोने का नाटक करने को मजबूर होकर तड़पता रहा। मौसी ने मेरे हाथों को पकड़ कर अपने चुच्चे खूब मसलवाये फिर मुझे पकड़ कर अपनी और घुमा लिया और मेरे ओंठों को अपने अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

मैं अभी भी आँखें बंद किये था, मेरा लण्ड झटके पर झटके खा रहा था मेरे लण्ड की हालत समुन्दर में प्यासे मगर्मच्छ के जैसी थी। तभी मौसी ने अपनी एक टांग उठा कर मेरे ऊपर ऐसे रखी कि मेरा लण्ड उनकी गर्म-गर्म रान के नीचे दब गया।

मैंने महसूस किया कि उनकी मैक्सी कमर तक ऊपर थी। जीवन में पहली बार इतनी चिकनी टांग मैंने अपनी टांग पर सटी हुई महसूस की, बहुत ही गर्म और केले की जैसे चिकनी बेहद नरम जांघें थी, शायद एक भी बाल नहीं होगा उन पर।

मेरे लण्ड का पानी छूटने को हो गया पर डर गया कि मौसी सब जान जायेंगी कि मैं जग रहा हूँ। मैंने पूरी ताकत लगा कर लण्ड को कंट्रोल में किया हुआ था।

अब मौसी की चूचियाँ मेरे सीने से रगड़ रही थी, मेरे होंठ उनके होंठों के बीच में थे, उनकी एक बांह मेरे ऊपर से होते हुई मेरी पीठ को सहला रही थी। मेरे कुंवारे लण्ड की अग्नि परीक्षा हो रही थी और मैं ससम्मान इसमें उत्तीर्ण होने का भरसक प्रयास कर रहा था।

अचानक मेरे ऊपर उनकी नंगी टांग और चढ़ गई। मैंने धधकती चूत की गर्मी को अपने लण्ड के बिल्कुल करीब महसूस किया। मुझे कहने में कोई शर्म नहीं कि जीवन में पहली चूत का स्पर्श मुझे मेरी मौसी जी ने दिया। मेरी चड्डी में खड़े लण्ड का लालच मौसी से रोका न गया वो मेरे सात इंच के लण्ड पर चड्डी के ऊपर से ही हाथ फिराने लगी थी और लण्ड पर हाथ रखते ही वो कराह उठीं जैसे उनके सारे जिस्म के दर्द की दवा उन्हें मिल गई हो।

मेरा दिल बड़े जोर से धधक-धड़क रहा था, मेरे लण्ड में फड़कन को मौसी ने बखूबी महसूस किया था इसीलिए उन्होंने मेरे फड़कते लण्ड को कस कर अपने हाथों में मजबूती से जकड़ लिया।

दोस्तो, यह मेरी सहनशीलता का चरम था। बड़ी बड़ी झांटों वाली गद्दीदार पाव रोटी जैसी बुर का गर्म एहसास अपनी जांघ पर पाकर बड़ी बड़ी चूचियों से सटे होकर एक औरत के हाथ में लण्ड कितनी देर बर्दाश्त करता। मैंने भी सारी शर्म त्याग दी और चड्डी के अन्दर ही मौसी के हाथों में कसे कसे लण्ड ने पूरी धार से पानी छोड़ दिया। मैं ऊँ ऊ ऊं.. करके उनकी बाहों में एक बार मचला, फिर शांत हो कर लण्ड को आख़िरी बूँद तक झड़ने देता रहा।

मौसी अभी यही समझ रहीं थीं कि मैं उत्तेजित होकर नींद में ही झड़ा हूँ। उन्होंने मेरा लण्ड कस कर पकड़े रखा जब तक मैं पूरा झड़ नहीं गया। उनका हाथ चड्डी के ऊपर से गीला हो चुका था, मैंने अपनी जांघ पर उनकी चूत का गीलापन साफ़ महसूस किया वो भी झड़ चुकी थी। अपने हाथ में लगे मेरे लण्ड के पानी को चाट रही थी वो ! चुद तो नहीं सकी थी पर एक युवा मर्द के संपूर्ण अंगों से खेलने का सुख शायद उनको बहुत समय बाद मिला था।

वो बिस्तर पर मेरा किसी औरत के स्पर्श का पहला अनुभव था और औरत के जिस्म का सही पहला सुख...

मैं मौसी को उस रात चोद तो न सका, शायद अनाड़ीपन और शर्म के कारण ! पर अपने कसरती जिस्म का जो चस्का मैंने मौसी जी को लगा दिया था उससे मुझे पता था कि आने वाली सैकड़ों रातों में वो मेरे बिस्तर पर खुद आने वाली थी और मैंने भी सोच लिया था कि मौसी की सालों से बंजर पड़ी चूत के खेत में अपने लण्ड से न सिर्फ कस कर जुताई करनी थी बल्कि खाद पानी से उसे फिर से हरा भरा करना था।

मौसी को कस कर पेलने का अरमान दिल में लिए मैं गीली चड्डी में चिपचिपेपन को बर्दाश्त करता हुआ सो गया।

अगले दिन सुबह मौसी मेरे साथ इस तरह सामान्य थी जैसी रात में कुछ हुआ ही न हो।

मैं शुरू में तो उनसे आँख चुरा रहा था पर उनका बर्ताव देख कर मैं भी कुछ सामान्य हो गया पर...

lady.wantme@gmail.com


मोहिनी का कमर दर्द-1 - Mohini Ka Kamar Dard 1


मोहिनी का कमर दर्द-1
प्रेषक : प्रथम

हेलो दोस्तो,

यह मेरी पहली कहानी है अन्तर्वासना पर जिसे मैं आप सबको बताना चाहता था मगर समय ही नहीं मिल पाता था।

यह कहानी मेरी और मेरी प्यारी सासू माँ की है जिसका नाम मोहिनी है। वो उस वक़्त करीब 45 की रही होगी और उसका फिगर करीब 34-32-36 होगा। मेरी शादी से पहले से ही जबसे मैंने उसे देखा था उसकी भारी हुई गाण्ड हमेशा से ही मुझे आकर्षित करती थी। करीब दो साल तक मैं उसके नाम से मुठ मारता रहा था और यहाँ तक कि जब भी अपनी बीवी को चुदाई करता था तब भी मेरे दिमाग़ में वही रहती थी और में यही सोचा करता था कि मैं मोहिनी को ही ठोक रहा हूँ।

तो बात उस समय की है जब हम लोग सास ससुर के साथ मेरे साले के घर पुणे घूमने गये थे। तभी अचानक से एक खबर आई कि मेरे ससुर के कोई रिश्तेदार गुजर गए हैं और हम सबको मुंबई जाना था।

हम सबने तैयारी कर ली कि तभी मोहिनी को अचानक से कमर में दर्द होने लग गया। अब जाना भी ज़रूरी था और उसे इस हालत में लेकर भी नहीं जा सकते थे तो मैंने कह दिया कि आप लोगों के रिश्तेदार हैं, आप लोग जाओ, मैं और मम्मी जी यहीं रह जाएँगे और जब इनकी तबीयत ठीक होगी तब हम आ जाएँगे।

अब और कोई चारा भी नहीं था उन लोगों के पास और मैं मन ही मन सोच रहा था कि शायद आज मेरे भाग जाग जाएँ।

फिर मैं उन लोगों को पुणे से मुंबई की बस में बिठा कर आया। मोहिनी घर में ही थी।जैसे ही घर गया मैंने घण्टी बजाई तो मोहिनी ने दरवाजा खोला। मैंने देखा कि उसने अपने कपड़े बदल लिए हैं, अब उसने एक मैरून रंग की नाइटी पहन ली है जिसमें वो बहुत सेक्सी लग रही थी।

मैंने पूछा- कैसी हैं आप?

तो वो बोली- हाँ, थोड़ी भीड़ कम हुई है घर की तो अच्छा लग रहा है !

असल में वो जाना ही नहीं चाहती थी क्योंकि जिनकी मृत्यु हुई है उनसे मोहिनी का पंगा चलता था और इसीलिए मेरे ससुर जी ने भी शायद उसे रहने दिया।

खैर मैंने कहा- अब तो 3-4 दिन की कम से कम फ़ुर्सत ही है। आप और मैं आराम करेंगे घर में !

तो वो बोली- हाँ बिल्कुल दामाद जी ! आपको आराम मिले, यही तो मैं चाहती हूँ !

और इतना बोलकर उसने एक कुटिल मुस्कान दी।

मैंने उसको पूछा- क्या सही में आपकी कमर में दर्द है? तो मैं मालिश कर देता हूँ, थोड़ा आराम मिल जाएगा !

तो वो बोली- इतना ज़्यादा दर्द तो नहीं है, मगर हाँ, अगर आप मालिश कर दोगे तो शायद आराम ही मिल जाए मेरे इस शरीर को।

मैंने कहा- चलो तो फिर आज मैं आपको बॉडी मसाज देता हूँ।

और इतना कहकर मैंने उसे इशारा किया की चलो बेडरूम में चलते हैं।

और हम दोनों बेडरूम में आ गये।

उसने कहा- बेटा, आप कपड़े बदल लो, वरना तेल आपके कपड़ों में लग जाएगा और कपड़े खराब हो जाएँगे।

तो मैंने कहा- यहाँ इतनी गर्मी है, तो बदलना क्या, जो पहना हूँ वही उतार दूँगा।

वो बोली- ठीक है, जैसी आपकी मर्ज़ी।

फिर मैंने तेल की शीशी उठाई और टीवी चला दिया।

मैंने कहा- आप बिस्तर पर बैठे रहो, मैं मालिश शुरु करता हूँ !

वो बोली- आपकी जैसी मर्ज़ी, वैसी मालिश कर दो दामाद जी ! मैं तो कब से बॉडी मसाज का इन्तजार कर रही हूँ, मगर आपके ससुर तो कभी करते ही नहीं।

फिर वो बेड से टिक कर बैठ गई और मैं उसके पास बैठ गया, मैंने कहा- मैं पहले आपके सिर से शुरु करता हूँ !

वो बोली- ठीक है।

मैंने उसके बाल खोल दिए और वो खुले बालों में और मैरून नाइटी में कयामत लग रही थी। फिर मैं उसके पीछे बैठ गया और अपने दोनों पैर उसके दोनों तरफ डाल कर उसे बीच में अपने से टिका लिया और अपने हाथों में तेल लेकर उसके सिर में मालिश शुरु की हल्के हल्के हाथों से !

इतने में ही मेरी पैंट में हलचल होने लगी थी जिसे उसने पहचान लिया, वो बोली- अरे दामाद जी, ऐसा लग रहा है कि आप भी काफ़ी दिनों से मेरी मसाज करने की इंतज़ार में थे?

मैं कुछ नहीं बोला, बस मुस्कुरा दिया।

फिर उसने मुझे कहा- ऐसे तो आपकी पैंट खराब हो जाएगी, आप आराम से रहो, इतने फॉर्मल मत बनिए, जैसे आप अपने घर में रहते हो, वैसे भी रह सकते हो, मैं आपको कुछ नहीं कहूँगी और ना ही कुछ करूँगी।

तो मैंने कहा- अब ठीक है, आप इतना बोल रही हैं तो मैं अपनी पैंट उतार देता हूँ।

कह कर मैंने अपने पैर बाहर निकले तो वो पीछे घूम गई बोली- रहने दो, आपसे शायद नहीं होगा, मैं आपकी मदद कर देती हूँ पैंट उतारने में !

और इतना बोल कर उसका हाथ सीधे मेरी जीन्स के हुक पर गया और मैं पीछे बेड पर टेक लगा कर बैठ गया अपने दोनों पैर फैला कर और उसने मेरी जीन्स के बटन खोल कर ज़िप खोल दी।

मैं आराम से बैठा हुआ था तो वो बोली- अरे, आप तो आराम से बैठ गये, अब उतरुँगी भी मैं ही क्या आपकी जीन्स?

तो मैंने कहा- प्लीज़ उतार दीजिए ना।

तो वो मुझे देख कर मुस्कुरई और बोली- ठीक है, अब अपनी तशरीफ़ उठाएँ तो मैं निकालूँ उसे।

तो मैंने अपनी गाण्ड उठाई और उसने दोनों हाथ मेरी गाण्ड के नीचे डाल कर मेरी जीन्स निकाल दी, फिर वो बोली- लाइए अब एक बार उठे हैं तो टीशर्ट भी निकाल ही देती हूँ, मुझे पता है कि आप घर में बॉक्सर और टॉपलेस ही रहते हो।

कहकर उसने मेरी टीशर्ट भी निकाल दी। अब मैं उसके सामने सिर्फ़ बॉक्सर में ही था। तभी उसने मेरे बॉक्सर में बने तम्बू को देखा तो बोली- अरे लगता है कि कोई तो आज किसी और ही मसाज के मूड में है।

मैंने उसे देखा और कहा- हाँ, मैं फ्री में कुछ नहीं करता और यह मसाज भी आपको फ्री में नहीं दूँगा।

तो वो बोली- बदले में जो चाहिए, सब ले लो, जो मेरे पास है सब आपका ही है।

कहकर वो मेरे ऊपर गिर गई और मैं उसके नीचे दबा हुआ था और उसने अपनी जुल्फे मेरे चेहरे पे फैला दी और हम दोनों उसकी ज़ुल्फो के साए में एक दूसरे को चूम रहे थे।

हम दोनों ने शुरु ही होंठों के चुम्बन से किया। हम दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठों से मिले हुए थे और एक दूसरे की ज़ुबान को चूस रहे थे।

मैंने अपने हाथों को धीरे धीरे उसकी पीठ पर फेरना शुरू कर दिया और अपनी दोनों टाँगे उसकी कमर से निकाल कर उसके कमर के दोनों ओर लपेट ली।

वो बोली- मसाज-वसाज तो गई माँ चुदाने ! आज तो चुदाई की रात है, मेरी दूसरी सुहागरात है आज तो।

कह कर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके सिर को कस कर पकड़ लिया और उसके मुँह में अपने होंठ और जुबान घुसा दी। वो भी ऊपर से अपनी चूत को मेरे लण्ड पर दबा रही थी। अब मैंने अपने दोनों हाथ उसकी गांड पर ले आया और उन्हें दबाने लगा। उसकी सिल्क की नाइटी मेरे नंगे बदन पर बड़ा अच्छा अनुभव दे रही थी।

तभी वो उठ कर बैठ गई और बोली- पहले जो काम कर रहे थे वो तो करो दामाद जी !

उसका इशारा शायद मसाज की तरफ था तो मैंने फिर से उसके दोनों ओर टाँगे डाल कर उसके सिर में मसाज शुरू दी मगर अब मेरा दिमाग और मेरा लण्ड दोनों ही इस लायक नहीं थे कि मैं उसकी हेड-मसाज करूँ तो मैंने फिर उसके बालों को एक तरफ़ किया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा और अपने हाथ उसके बालों से निकाल कर उसके चेहरे और गर्दन पर फिराने लगा।

अब उसकी आँखें बंद हो गई थी और वो भी मज़ा ले रही थी। फिर मैंने महसूस किया कि उसका एक हाथ मेरी जाँघों पर फिर रहा है और दूसरे हाथ से वो अपनी ही चूत दबा रही थी।

फिर उसने अपनी दोनों टाँगें फैला दी जिससे उसकी नाइटी उसके घुटनों तक सरक गई और उसकी गोरी-गोरी टाँगे मेरे आँखों के सामने आते ही मैंने अपना आपा खो दिया और अपने दोनों हाथ उसके स्तनों पर ले आया और नाइटी के ऊपर से ही उनकी मालिश करने लग गया। मगर उसने अंदर ब्रा पहनी थी तो मुझे कुछ मज़ा नहीं आ रहा था। फिर मैंने उसे आगे बिठा कर उसकी दोनों बाँहे ऊपर उठा कर उसकी बगलों में चूसने लगा।

आअहह ! उसके पसीने की वो खुश्बू जिसने हमेशा से मुझे उसका दीवाना बना कर रखा था, आज मैं वही सूंघ रहा था और मैं उसकी बगलें चाटने लगा। उसने बगलें एकदम साफ कर कर रखी थी।

वो बोली- मुझे पता है कि आपको बगलों में सूंघना बहुत पसंद है।

फिर मैं उसकी बगलों में सूँघते हुए उसके स्तनों को दबाता रहा और फिर मैंने उसकी नाइटी को और ऊपर उसकी जाँघों तक सरका दिया और अपना एक हाथ उसकी जाँघों पर फेरने लगा तो वो पागल ही हो उठी और तड़प कर उसने एक आआआहह भरी, ज़ोर से उसने मेरे लण्ड को बॉक्सर के ऊपर से ही पकड़ लिया और उसे मसलने लगी।

फिर वो एकदम से पलट कर बोली- बस अब और नहीं सहा जाता मुझसे ! बहुत दिन दूरी सह ली, अब और नहीं !

और पलट कर उसने बॉक्सर के ऊपर से ही मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और अपने दोनों हाथ मेरी जाँघों पर फेरने लग गई।

अब मैं लेट गया था और लेटे-लेटे उसे देख रहा था। फिर उसने अपने हाथों को मेरे बॉक्सर के अंदर सरका कर लण्ड को पकड़ लिया और उसने एक झटके से बॉक्सर को खींच कर उतार दिया। मेरा लण्ड उसे सलामी देता हुआ स्प्रिंग के तरह बाहर आ गया और वो तो अपना आपा ही खो चुकी थी, उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था, उसने मेरे लण्ड के सुपारे को पीछे खींच कर उसकी गुलाबी चमड़ी को खींच कर निकाला और अपनी जीभ धीरे धीरे उस पर फिराने लग गई।

मुझे ऐसा लगा जैसे मैं सातवे आसमान पर हूँ।

उसकी नाइटी गले में से उसके स्तन ब्रा में क़ैद दिख रहे थे। मैं नाइटी के ऊपर से ही उसके स्तन दबाने लग गया और एक हाथ से उसकी गाण्ड सहलाने लग गया। फिर देखते देखते ही मैंने उसकी नाइटी को उसकी गाण्ड के ऊपर से सरका लिया और फिर वो थोड़ी सी हिली तो मैंने उसकी नाइटी को उसके सिर से निकाल दिया और उसकी नाइटी को ही सूंघने लगा।

आआआआहह ! दोस्तो क्या खुश्बू थी उस नाइटी में।

अब वो मेरे सामने सफ़ेद ब्रा और लाल सफ़ेद धारीदार पैंटी में थी और झुकी हुई मेरे लण्ड को चूस रही थी।

मेरे लण्ड में से भी अब लेस बाहर आने लगा था जिसे वो बड़े चाव से चूस और चाट रही थी।

वो बोली- मैंने आज तक जिंदगी में कभी लण्ड मुँह में नहीं लिया और मैं यह भी जानती हूँ कि आपको लण्ड चुसवाना बहुत पसंद है। जिस दिन मेरी बेटी ने...

कहानी जारी रहेगी।

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