मेरा नाम विक्रम है और मै २२ साल का लड़का हु | मै अभी एक कॉलेज मे पढ़ रहा हु | जब मेरे शरीर मे परिवर्तन आने शुरू हुए है, मुझे उनके प्रति काफी उत्सुकता थी | मेरे पास अपना लैपटॉप था और मै उसपर अपने कमरे पे बैठ कर ब्लू फिल्म देखता था और मुठ मारता था | मुझे ब्लूफिल्म देखकर मुठ मारने मे मज़ा तो आता था, लेकिन अब मै कुछ असली मे करना चाहता था | मेरे पड़ोस मे रहने वाली आंटी सविता बहुत सेक्सी थी और मै उनको एक बार चोदना चाहता था | कभी-कभी मै उनको याद करके, उनके नाम पर मुठ भी मार लिया करता था | उनकी एक बेटी थी मिली , जो मेरी ही हम उम्र हुआ करती थी | हम दोनों के परिवार फॅमिली-फ्रेंड्स थे और अक्सर सारे फेस्टिवल साथ मे मानते थे और बाहर भी घुमने जाते थे | इस बार कॉलेज की छुट्टियों मे, पुरे परिवार का एक साथ घुमने जाने का प्रोग्राम बना | मै और मिली बहुँत खुश थे | जाने के एक दिन पहले ही वो हमारे घर आ गये | मै और मिली काफी समय बाद मिलकर बहुत खुश थे और काफी सारे प्रोग्राम बना रहे थे |सविता आंटी दिन पर दिन सेक्सी होती जा रही थी | जाने वाले दिन जब मै उनसे मिला, तो मैने उनको कसके इस प्रकार गले लगा लिया, जैसे की हम पहली बार मिले हो और उनके चुचे मेरी छाती मे धस गये | उनको शायद कुछ महसूस हुआ, तो उन्होंने मेरी माँ को बोला, विक्की अब बड़ा हो गया है | असल मे, मैने उनके बड़े चूचो की मोटाई को महसूस करने के लिए उनको गले लगाकर जोर से दबाया था | वो और मम्मी जाने की सारी तैयारिया कर रही थी | मेरे पापा और अंकल सब कुछ चेक कर रहे थे; ताकि, आखरी समय मे कोई दिक्कत न हो | मै बस सोच रहा था, कि आंटी को मै कैसे छुओ? इस सोच विचार मे और उदेड्बुन मे सारी रात निकल गयी और सुबह निकलने का समय हो गया | हम एक छोटी सी बस मे थे और हँसते और गाते जा रहे थे | हमने वहा पहुच कर सुबह का नाश्ता लिया और वाटरपार्क मे मस्ती करने के लिए आ गये | आंटी ने तैराकी वाली पोशाक पहनी थी और वो बहुत ही मस्त लग रही थी | उनके चुचे इतने बड़े थे और वो पोशाक मे से निकलने को बेताब थे, मेरा लंड बार-बार खड़ा हो रहा था |मै सिर्फ अंडरवीअर मे था और मेरा खड़ा लंड सबको दिख सकता था, मै तो बस उसको छिपाता हुआ घूम रहा था | जब मेरा लंड थोडा सा शांत हुआ, तो मै वाटरराईड्स मे चला गया | कुछ देर मैने मिली के साथ मस्ती की | मेरी मम्मी पानी से डरती थी, वो बाहर खड़े होकर हम सबके कपडे संभाल रही थी और फोटो खीच रही थी | मेरे सामने वाली राईड पर आंटी थी और वो भीगी हुई किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी | मेरे लंड ने फिर से जोर मारना शुरू कर दिया |मैने मन ही मन कुछ सोचा और सविता आंटी के पास पहुच गया | मै दबे पाँव चाची पीछे पंहुचा और उनको पीछे से पकड़ लिया और मैने उनके चूचो पकड़ा और हल्का सा दबा दिया | उन्होंने डर के पीछे देखा, तो मै हसने लगा | उन्हें लगा, कि ये मैने गलती से किया है तो उन्होंने कुछ नहीं कहा | मैने आंटी का हाथ पकड़ा और उनको एक दूसरी राईड पर चलने के लिए बोला | वो मेरे साथ चली गयी | इस राईड मे, हम एक घुमने वाले पटरे पर खड़े थे और हमारे ऊपर काफी तेज़ी से पानी गिर रहा था | मै और आंटी दोनों उस पर खड़े हो गये, लेकिन पटरे की तेज़ी के कारण, ढंग से खड़े नहीं हो पा रहे थे | इसलिए, हम दोनों के एक दुसरे के हाथ पकड़ लिए थे | लेकिन, पानी की तेज़ी के कारण हमारे हाथ छुट गये और मैने उनके चुचे पकड़ लिए | आंटी ने फिर से नोटिस नहीं किया और हमने एक बार और किया | मेरे लंड ने फुदकना शुरू कर दिया था और इस बार भी मैने आंटी के चुचे दबा दिए और मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया | आंटी ने मेरे लंड को देखा तो वो समझ गयी और झूले से उतरकर चली गयी |वो बाथरूम मे कपडे बदलने चली गयी और मै भी उनके पीछे भागा | मुझे उनके बाथरूम का एक रोशनदान मिल गया | और मै उसमे से झाकने लगा | आंटी एक दम नंगी थी और उनके बड़े चुचे देखकर मेरा लंड रिसने लगा था | उनकी छुट पर छोटे-छोटे बाल थे और उसका शरीर बड़ा मस्त था | मेरा लंड एक दम तना हुआ था और मैने वही पर अपना अंडरवीअर उतारा और हस्त्मथुन करने लगा | आंटी ने मुझे कुछ नहीं बोला और मै शाम तक उनके साथ हंसी मजाक करता रहा | रात को सोने के हमे एक ही कमरा मिल पाया | उसमे एक पलंग और एक सोफा था | पलंग पर तो मेरे माँ-पापा सो गये और सोफे पर अंकल | मेरे लिए, मिली के लिए और आंटी के लिए जमीन पर बिस्तर लगा लिया | मम्मी ने आंटी को धीरे से बोला, कि ये दोनों अब बड़े हो चुके है | तुम इनके बीच मे सोना, मेरी बात समझ गयी न |सविता आंटी मेरे और मिली के बीच मे सोई हुई थी, मुझे तो मेरी मुराद मिल गयी थी | आंटी सो गयी थी, लेकिन मेरी आँखों से नीद कोसो दूर थी | मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और मुझे समझ नहीं आ रहा था, कि मै क्या करू? मैने अपना लंड आंटी की गांड के साथ रगड़ना शुरू कर दिया | मैने, अपने आप को पूरी तरह से आंटी के बदन से चिपका लिया और उनके चूचो को ऊपर से दबाना शुरू कर दिया | मुझे कुछ मज़ा सा नहीं आ रहा था, तो मैने, थोड़ी से हिम्मत करके उनके कपड़ो के अन्दर हाथ डालकर उनके चुचे दबाने शुरू कर दिए और अपने लंड को मै उनकी गांड पर रगड़ता रहा | कुछ मज़ा सा नहीं आ रहा था, तो मैने अपने सारे कपडे निकाल दिए और नंगा लंड उनकी गांड पर रगड़ने लगा | आंटी अभी भी सो रही थी और मेरी हिम्मत और बड़ गयी | मैने हाथ डालकर उनकी पेंटी उतार दी और उनकी चूत मे ऊँगली करने लगा | फिर, मैने आंटी की चूत मे अपना लंड घुसा दिया और उनको चोदने लगा, लेकिन मेरा लंड ठीक से चूत मे नहीं घुसा था और मै पूरी कोशिश कर रहा था | फिर, आंटी की नीद खुल गयी | उन्होंने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर ढंग से लगाया, ताकि वो ठीक से अन्दर जा सके | मुझे मज़ा आ रहा था | और कुछ देर बाद, मैने अपना सारा पानी आंटी की चूत मे डाल दिया |मेरा लंड शांत हो चुका था और मैने अपने कपडे पहन लिए | आंटी उठी और बाथरूम चली गयी | लेकिन, उसके बाद से आंटी मुझे से दूर-दूर रहने लगी | उसके बाद मैने कभी आंटी के साथ सेक्स नहीं किया | लेकिन, वो याद एक मीठी सी याद बन गयी |
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